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Showing posts from February, 2025

दसवीं कक्षा के लिए 2026 से दो बार होगी परीक्षाएं

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 दसवीं कक्षा के लिए 2026 से दो परीक्षाओं की योजना https://www.cbse.gov.in/cbsenew/documents/SCHEME_BOARD_EXAMS_POLICY_25022025.pdf केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए 2026 से नई परीक्षा योजना प्रस्तावित की है। शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने और विद्यार्थियों को अधिक लचीलापन देने के उद्देश्य से, कक्षा 10वीं के लिए 2026 से दो परीक्षाओं की योजना प्रस्तावित की गई है। इस योजना के अनुसार, कक्षा 10वीं की परीक्षाएँ वर्ष में दो बार आयोजित की जाएँगी, जबकि कक्षा 12वीं की परीक्षाएँ वर्तमान की तरह एक बार ही होंगी। कक्षा 10वीं – 2026 परीक्षा योजना 1. परीक्षा संरचना: वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाएगी ताकि विद्यार्थियों को अपनी तैयारी के अनुसार अवसर मिल सके। छात्र दोनों परीक्षाओं में सम्मिलित हो सकते हैं और बेहतर अंकों वाली परीक्षा का परिणाम अंतिम माना जाएगा। यह प्रणाली बोर्ड परीक्षा के तनाव को कम करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए एक और अवसर देने हेतु बनाई गई है। 2. परीक्षा स्वरूप: प्रश्नपत्र का स्तर विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता और व्याव...

देश की विभिन्न यूनिवर्सिटी और कोर्सेस में प्रवेश के तरीके

कक्षा 12 की परीक्षा के बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों में दाखिला (Admission) लेने के इच्छुक छात्रों के लिए भारत में कई विकल्प उपलब्ध हैं। अब अधिकतर केंद्रीय विश्वविद्यालयों (Central Universities) और अन्य प्रमुख संस्थानों में प्रवेश के लिए एक सामान्य प्रवेश परीक्षा CUET (Common University Entrance Test) अनिवार्य हो गई है। 🔹 देश की विभिन्न यूनिवर्सिटी में प्रवेश के तरीके: 1️⃣ CUET (Common University Entrance Test) के माध्यम से प्रवेश 📌 यह परीक्षा किन विश्वविद्यालयों के लिए आवश्यक है? 👉 केंद्रीय विश्वविद्यालय (CU) और कुछ प्रमुख राज्य/प्राइवेट विश्वविद्यालय, जैसे: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) हैदराबाद विश्वविद्यालय और कई अन्य 📌 CUET के तहत प्रवेश प्रक्रिया रजिस्ट्रेशन करें –    (https://cuet.samarth.ac.in)  CUET की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन करें। परीक्षा दें – CUET स्कोर के आधार पर विश्वविद्यालयों में आवेदन करें। कटऑफ के अनुसार काउंसलिंग करें –...

माँ का प्यार: सबसे बड़ा खजाना

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एक दिन, एक छोटा बच्चा स्कूल से घर लौटता है। उसका चेहरा उदासी और गुस्से से भरा हुआ था। घर पहुँचते ही उसने अपनी मम्मी से शिकायत भरे लहजे में कहा, "माँ, आज मेरे दोस्त ने मुझे बताया कि उसके मम्मी-पापा उसे हर दिन नए खिलौने दिलाते हैं। उनके पास हर वो चीज़ है जो वो चाहता है। लेकिन आप लोग हमेशा बहाने बना लेते हो या फिर कहते हो कि बाद में दिलाएँगे। उनके मम्मी-पापा कितने अच्छे हैं और आप लोग तो कभी भी मेरी बात नहीं मानते। आप लोग तो बिल्कुल भी अच्छे नहीं हो!" यह सुनकर माँ का दिल टूट गया। गुस्से और दुख के मिलेजुले भाव से माँ ने कहा, "अगर तुझे ऐसा लगता है कि हम अच्छे नहीं हैं, तो बेटा, तुम अपने दोस्त के घर ही चले जाओ।" बच्चा चुपचाप अपने कमरे में चला गया। कुछ समय बाद, माँ ने देखा कि बच्चा रो रहा है। वह उसके पास गई, उसका सिर सहलाया और धीरे से बोली, "बेटा, क्या तुम जानते हो कि हम तुम्हारे लिए कितनी मेहनत करते हैं? तुम्हारे पापा दिन-रात काम करते हैं ताकि तुम्हारी ज़रूरतें पूरी कर सकें। हम तुम्हारे हर सपने को पूरा करना चाहते हैं, लेकिन कभी-कभी हमारे पास उतने पैसे नहीं होते। इसका ...

प्रेरणादायक कहानी: आदर्शों की तस्वीरें

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 प्रेरणादायक कहानी: आदर्शों की तस्वीरें    https://youtu.be/Qky6pG2cIL8 एक दिन, एक छोटा बच्चा अपने घर की दीवार पर टंगी तस्वीरों को बड़े ध्यान से देख रहा था। उसने देखा कि उसके मम्मी-पापा हर दिन एक विशेष तस्वीर के सामने दीप जलाते हैं और हाथ जोड़कर पूजा करते हैं। थोड़ी देर बाद, उसने जिज्ञासावश अपनी माँ से पूछा, "माँ, आप लोग इस तरफ टंगी हुई फोटो की पूजा करते हो, लेकिन दूसरी तरफ टंगी हुई फोटो की क्यों नहीं करते?" माँ और पापा दोनों ही उसके सवाल से हैरान रह गए। माँ ने प्यार से बेटे को पास बुलाया और बोली, "बेटा, जिन तस्वीरों की हम पूजा करते हैं, वे हमारे भगवान हैं। हम उनसे आशीर्वाद मांगते हैं और उनका सम्मान करते हैं।" बेटा फिर मासूमियत से बोला, "और दूसरी तरफ की तस्वीरों का क्या मतलब है?" इस बार पापा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "बेटा, ये तस्वीरें उन महान लोगों की हैं जो हमारे जैसे ही इंसान थे, लेकिन अब इस दुनिया में नहीं हैं।" बच्चा थोड़ी देर तक सोच में पड़ गया और फिर पूछा, "अगर वे अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो फिर हमने उनकी तस्वीरें घर में क्यों लग...

बच्चों की फोन देखने की आदत को कैसे छुड़वाएं

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आधुनिक युग की टेक्नोलॉजी ने जहां एक ओर हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाया है, तो वहीं दूसरी ओर इसका नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है।  इस तरह के आधुनिक यंत्रों ने हमारे बच्चों को घर के अंदर क़ैद कर के रख दिया है। इन यंत्रों ने बच्चों से उनका बचपन उनसे छीन लिया है। जिसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।  इस लेख के माध्यम से हम आपको कुछ सुझाव दे रहे है, जो कि आपके बच्चों के फोन देखने कि लत छुड़वाने मे मददगार तो होंगे ही साथ ही उनके मानसिक और शारीरिक विकास करने मे भी उपयोगी सिद्ध होंगे।  बच्चों की फोन देखने की आदत को छुड़वाने के लिए कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं: सीमाएं निर्धारित करें 1. फोन के उपयोग के लिए समय सीमा निर्धारित करें: बच्चों को फोन का उपयोग करने के लिए एक निश्चित समय      दें, जैसे कि शाम 6 बजे से 7 बजे तक। 2. फोन-मुक्त क्षेत्र बनाएं: घर में कुछ क्षेत्रों को फोन-मुक्त बनाएं, जैसे कि भोजन कक्ष या बेडरूम। वैकल्पिक गतिविधियाँ प्रदान करें 1. खेल और खिलौने: बच्चों को खेल और खिलौने प्रदान करें जो उन्हें फोन से दूर रखें। 2. पढ़ाई और शि...

छात्र सामाजिक विज्ञान का पेपर सॉल्व करते समय निम्नलिखित बातों का रखे ध्यान

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सामाजिक विज्ञान में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे कई विषय शामिल होते हैं। और इस दौरान छात्रों के मन मे कई तरह के संदेह (doubt) आदि रहते है जिससे उन्हें  कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता/पड़ सकता है। जैसे कि,  उन्हे हर विषय में कई महत्वपूर्ण तिथियाँ, घटनाएँ, सिद्धांत और आंकड़े होते हैं जिन्हें याद रखना कठिन हो   जाता है। इस समस्या के लिए निपटने के लिए निम्नलिखित समाधान दिये है।   भूगोल में नक्शे बनाने और सही तरीके से लेबल करने में कई छात्रों को परेशानी होती है। समाधान • हर विषय के लिए अलग-अलग नोट्स बनाएं। • टाइमलाइन चार्ट, मैप्स और माइंड मैप्स का उपयोग करें। • रोजाना थोड़े-थोड़े हिस्से का रिवीजन करें। • खाली नक्शों पर प्रैक्टिस करें। • लेबलिंग और चिन्हों का सही उपयोग करना सीखें। • समय पर नक्शा पूरा करने के लिए अभ्यास करें।  सामाजिक विज्ञान का पेपर सॉल्व करते समय छात्रों को ध्यान में रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें: ________________________________________ 1. प्रश्न पत्र पढ़ने की रणनीति • प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें: हर...

INTERNATIONAL MOTHER LANGUAGE DAY (अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस)

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 🤯 So you're multilingual? Cool!  But what about your mother tongue ? 🤔 I'm a Hindi- English vice-versa Translator, I live in Bangalore and I speak English with everyone.  And You know what, I don't like to speak  in English much because.   Because my mother tongue is Hindi. You know I Feel like their senses are heightened when I speak Hindi. Like, I swear the colors are brighter and the food tastes better when I'm speaking in Hindi! Maybe it's just me, or most others also ?  Here's a mind-blowing fact: Let's ditch the insecurity  As of February 2024, 52.83 crore people in India speak Hindi, which is 43.63% of the country's population.  And around 576.2 million people worldwide speak Hindi as their first language..   So feel a real connection between your mother tongue and our senses. Before ending those who don’t speak Hindi for fear of being judged. I have one question for them ! do they really matter to you ???  One step c...

किसी दबाव मे नहीं बल्कि छात्र अपनी रुचि के अनुसार स्ट्रीम का करें चयन

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कक्षा 10 पास करने के बाद विषय चयन को लेकर छात्र और अभिभावक अक्सर तनाव में रहते हैं, क्योंकि यह उनके भविष्य के करियर पर असर डालता है। कक्षा 11 मे विषय चयन से संबंधित तनाव को कैसे दूर करें और सही विषय कैसे चुनें? 1. छात्र की रुचि और क्षमता को समझें • सबसे पहले यह देखें कि छात्र की रुचि किस विषय में है। • जिन विषयों में छात्र को अच्छा लगता है और जिनमें वह बेहतर प्रदर्शन करता है, उन्हें प्राथमिकता दें। • जबरदस्ती किसी स्ट्रीम को न चुनें, बल्कि उस क्षेत्र को देखें जिसमें छात्र आनंद के साथ सीख सकता है। 2. किसी दबाव मे नहीं बल्कि छात्र अपनी रुचि के अनुसार स्ट्रीम का करें चयन  (A) साइंस (Science) - मेडिकल और नॉन-मेडिकल अगर किसी छात्र की रुचि गणित (Maths) और विज्ञान (Science) में है और वह इंजीनियरिंग, मेडिकल, रिसर्च या टेक्नोलॉजी में जाना चाहता है, तो उस छात्र के लिए साइंस स्ट्रीम सही होगी।  • PCM (Physics, Chemistry, Mathematics) – इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, NDA, डिफेंस, डाटा साइंस • PCB (Physics, Chemistry, Biology) – डॉक्टर, फार्मेसी, बायोटेक, नर्सिंग • PCMB (Physics, Che...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बनाम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986: मे मुख्य अंतर

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NEP का मतलब है National Education Policy (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) है। इस शिक्षा नीति की घोषणा भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को की गयी थी। 1986 की  शिक्षा नीति के स्थान पर एनईपी 2020 शिक्षा नीति को लाया गया। एनईपी 2020 का मुख्य उद्देश्य देश की शिक्षा प्रणाली को दिशा और रूपरेखा प्रदान करने के साथ शिक्षा को अधिक समावेशी, लचीला और गुणवत्तापूर्ण बनाना है, ताकि छात्रों को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जा सके।  मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई थी. इस कमिटी ने मई 2019 में सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए एनईपी का ड्राफ़्ट सौंपा था. 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की मुख्य विशेषताएं: शिक्षा का प्रारंभिक ढांचा: 5+3+3+4 का संरचना मॉडल : 5 साल: फाउंडेशनल स्टेज (प्रारंभिक बाल शिक्षा और कक्षा 1-2) 3 साल: प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3-5) 3 साल: मिडिल स्टेज (कक्षा 6-8) 4 साल: सेकेंडरी स्टेज (कक्षा 9-12) बहुभाषी शिक्षा: प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा या स्थानीय भाषा में पढ़ाने पर जोर। तीन-भाषा फॉर्मूला: क्षेत्रीय भाषा, हिंदी...

जेमिनी 2.0 AI मॉडल के साथ गूगल बना और स्मार्ट

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हाल ही मे गूगल ने अपना अब तक का सबसे सक्षम AI मॉडल लॉन्च किया है। गूगल के अनुसार इस नए AI मॉडल को एजेंटिक युग के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पर आधारित सिस्टम है, जो गूगल के चैटबॉट या डिजिटल सहायक के रूप में कार्य करता है। यह GPT-3 या GPT-4 जैसे मॉडल्स से प्रभावित है, लेकिन इसमें गूगल की विशेषताओं और डेटा संसाधन का उपयोग होता है। जेमिनी 2.0 में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की कई खासियतें हैं जो इसे डीप सीक और AI से एक उन्नत और शक्तिशाली तकनीकी प्रणाली बनाती हैं।  1. बेहतर प्राकृतिक भाषा समझ: गूगल ने जेमिनी 2.0 को और ज्यादा बेहतर और प्रभावशाली बनाने के लिए, इसमे नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) का इस्तेमाल किया है, जो इसे अधिक प्रभावी तरीके से मानव भाषा को समझने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। इसका मतलब है कि यह जटिल सवालों और संवादों को भी अच्छे से समझ सकता है। 2. संवादात्मक क्षमता: जेमिनी 2.0 में कंटेक्स्ट-अवेयर (context-aware) संवाद क्षमताएँ हैं, जिसका मतलब है कि यह किसी बातचीत के पिछले संदर्भ को ध्यान में...

प्रयास करते जाओ, आगे बढ़ते जाओ जीवन के इस पथ पर निखरते जाओ

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 हार तब नहीं होती, जब हार जाते हैं, बल्कि हार तब होती है, जब हार मान जाते हैं। हर एक शख्स को अपने जीवन मे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान कई लोग संघर्ष की सीढ़ी पर चलकर सफलता की राह से कांटो को हटाते है और कुछ उनसे डरकर अपनी राह मे विराम लगा देते है। लेकिन असली हार तब होती है, जब हम जीवन की चुनौतियों और कठिनाइयों के सामने हार मान लेते हैं। सफलता की राह इतनी भी आसान नहीं होती, जितनी की सबको लगती है।  लेकिन उस रास्ते पर चलने वाला हर व्यक्ति अगर कभी गिरता है तो वह सिर्फ एक अस्थायी असफलता होती है, जो आगे चलकर उसे एक मजबूत और बेहतर इंसान बना देती है। जीवन की असली चुनौती हमारे सामने कभी न कभी ऐसी स्थिति आती है, जहां हमें लगता है कि बार बार प्रयास करने के बावजूद भी हम असफल हो रहे है या हम असफल हो गए हैं। जिससे हम निराश होकर थक जाते, और हमारे मन मे नकारात्मक विचार पनपने लगते है।  इसके कारण सब कुछ छोड़ देने का मन करता है। लेकिन सच यही है कि असफलता एक प्रक्रिया है, और जब तक हम कोशिश करते रहते हैं, हम हार नहीं सकते। असली हार तब होती है, जब हम अपने सपनों और लक्ष्यो...

हार तब नहीं होती, जब हार जाते है

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हार तब नहीं होती,  जब हार जाते है  बल्कि हार तब होती है,  जब हार मान जाते है।  निराश हो कर  हार मान जाना  सफलता के रास्ते  बंद कर देता है सपने और लक्ष्यों को  मंझधार मे छोड़ देता है हार मानने से पहले  पुनः प्रयास करो आशावादी बनो और  अभ्यास करो     भूपेंद्र रावत   

हार मान जाओगे तो जीतोगे कैसे?

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हार मान जाओगे तो  जीतोगे कैसे? किताब अपनी किस्मत की  लिखोगे कैसे? प्रयास करने पर ही तो  द्वार सफलता का खुलता है  किस्मत वालों का नहीं  मेहनत करने वालों का भाग्य बदलता है प्रयास अगर  विफल हो भी जाये तो,  संयम रखना होता है  राह के कांटो को कुचल आगे चलना होता है  हार अंतिम  परिणाम नहीं  स्वीकार करों उठो और अंतिम  सांस तक प्रयास करों  भूपेंद्र रावत   

खुशी और गम के साथ मैंने जिया है, जीवन को

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खुशी और गम के साथ  मैंने जिया है, जीवन को गम के दिनों से  मैं हुआ रूबरू हँसते हुए, जीवन की चुनौतियों से  मैंने नहीं मानी हार  बल्कि मैंने ज़िंदगी के  हर पल का उठाया  भरपूर लुत्फ  जीने की, कि कोशिश  जीवन की राह पर  मैंने देखें कई मोड नकाब ओढ़े हुए  और बदलते हुए  चेहरे के साथ   लेकिन नहीं मानी मैंने हार  आशाओं से भरे  जीवन मे  मैंने सीखा  ज़िंदगी को जीना क्योंकि मुझे पता था  अभी बहुत कुछ  है शेष, जीवन में  

पुरुष जो मंडराते रहे भौरों की तरह हर एक स्त्री पर

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पुरुष जो मंडराते रहे  भौरों की तरह  हर एक स्त्री पर,  उनकी नज़रे चिपकी रहती है  स्त्री की हर अदा पर  वे स्त्री के पास मंडराते है  जैसे भौरें  फूलों के आसपास, उनकी बातें मीठी और मधुर होती है  लेकिन उनके इरादे क्या होते है? क्या उनके इरादे होते है, प्रेम के?  क्या वे स्त्री का सम्मान करते है? या बस अपने स्वार्थ के लिए या  फिर शारीरिक संतुष्टि के लिए  करते है उनका उपयोग ? स्त्री को सावधान रहना चाहिए  ऐसे पुरुषों से  जो मंडराते रहते है उनके इर्द-गिर्द  उनकी नज़रों मे  छुपा होता है  एक खतरा जो  पहुंचा सकता है नुकसान स्त्री को।    भूपेंद्र रावत 

मैंने देखा है विशाल पर्वतों को सूक्ष्म होते हुए।

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मैंने सुना है, बुजुर्गों से  पहाड़ नहीं होते बूढ़े  वो कल भी अटल थे  आज भी अटल है  और भविष्य मे भी ऐसे ही रहेंगे  लेकिन मैंने महसूस की है  उजड़ते हुए पहाड़ की पीड़ा  कभी नहीं देखा मैंने  खोखले होते पहाड़ को चीखते और चिल्लाते हुए  बल्कि मैंने देखा है उन्हें    भूस्खलन के रूप मे  नीचे खिसकते हुए समतल बनते हुए  मैंने देखा है  विशाल पर्वतों को  सूक्ष्म होते हुए।     भूपेंद्र रावत   

दुनिया के शोर से दूर

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दुनिया के शोर से दूर  एकांत जरूरी है।  मन की शांति के लिए  स्वयं को समझने के लिए  कमियों को दूर करने के लिए  क्योंकि, एक दिन की तपस्या से  नहीं बना कोई बुद्ध, और विवेकानंद  बल्कि भौतिक जीवन को  त्याग कर, जिन्होने भी  अपनाया एकांत  उन्हें प्राप्त हुआ दिव्य ज्ञान   भूपेंद्र रावत 

दुनिया की शुरुआत हुई थी, शून्य से

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दुनिया की  शुरुआत हुई थी,  शून्य से  धीरे-धीरे बदलाव के साथ  विकसित होती गयी, दुनिया और  विकास की हर एक सीढ़ी पर  दस्तक दी, विनाश ने  धीरे-धीरे लुप्त होते गए  वन्य-जीव  और उनकी  अस्थियों को रखा गया  संग्रहालय मे  वृक्ष काटने की श्रंखला मे  लुप्त होते गए जंगल अस्तित्व मे आई    "मानव सभ्यता" और  मानव बस्तियां, समय के साथ होते बदलाव मे जो नहीं कर सकें समायोजन   धीरे-धीरे वो होते गए लुप्त    शेष रह गयी  जो मानव प्रजातियां उसे नाम दिया गया  "होमो सेपयंस" और  उनके वंशज  हर एक बदलाव और  मानव प्रजातियों  के दस्तावेजों को  पुन: रखा गया  संग्रहालयों मे   लेकिन फिर से शून्य होती  दुनिया के दस्तावेजों  के लिए कौन  बनाएगा "संग्रहालय" 

सीबीएसई बोर्ड 2026 की आन्सर शीट भरते समय छात्र निम्न निर्देशों का करें पालन

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सीबीएसई बोर्ड 2026 की परीक्षा देने जा रहे छात्रों के मन मे संशय है कि, कहीं बोर्ड की आन्सर शीट भरते समय उनसे कोई गलती ना हो जाये। वह बोर्ड कि आन्सर शीट सावधानी पूर्वक कैसे भरें ।   1. छात्र शीट भरने के लिए जेल पेन का प्रयोग ना करें। जेल पेन के स्थान पर काले या नीले बॉल प्वाइंट पेन का प्रयोग करें। 2. छात्र  अपना नाम, रोल नंबर, सेंटर नंबर,सब्जेक्ट कोड, स्कूल नंबर,इत्यादि उचित रूप से भरे। तथा उसके नीचे दिये गए बुलबुलों को पूरी तरह से काला कर दें।  3. आपकी शीट पर जहाँ यह निर्देश दिया गया है कि, आपको बुलबुलों को पूरी तरह से भरना है, वहाँ टिक मार्क या क्रॉस मार्क न लगाएँ। अगर कोई छात्र बुलबुलों को अच्छे तरह से नहीं भरता है या फिर आधा भरा छोड़ कर आ जाता है तो इस  भरे हुए या ज़्यादा भरे हुए बुलबुलों को सॉफ़्टवेयर अच्छे से पढ़ नहीं पाएगा। 4. जब तक ऐसा न कहा जाए, अपने उत्तरों को चिह्नित करने के लिए कभी भी पेंसिल का उपयोग न करें, ऐसी स्थिति में केवल HB या 2B पेंसिल का ही उपयोग करें। 5.  आन्सर शीट को भरते समय छात्र, त्रुटियों को सुधारने के लिए  कोई भी ऐसी तकन...

स्त्री जिन्होने निस्वार्थ

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स्त्री जिन्होने निस्वार्थ प्रेम किया पुरुष से समर्पित कर दिया स्वयं के जीवन को उनकी दास्तां को रखा गया अमर उनमे से कुछ बनी मीरा, तो कुछ यशोधरा, तथा कुछ को जाना गया राधा के नाम से परंतु जिन स्त्रियों  ने बाहरी मोह मे त्याग दिया स्त्री के स्त्रीत्त्व और ममत्व को अपने प्रेम से ज्यादा तवज्जो दी भौतिक सुख, अपने स्वार्थ को उनके लिए निजात हुआ एक नया शब्द उनके व्यक्तित्व को परिभाषित करने के लिए जरूरत पड़ी उपसर्ग “बे” की जिसे जोड़ा गया “वफा” से पूर्व और इस तरह बनी “बेवफ़ा”

मात-पिता, बच्चों के व्यवहार मे सकारात्मक परिवर्तन कैसे लाएं

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उम्र बढ़ने के साथ-साथ बच्चों के व्यवहार मे कई तरह के परिवर्तन होते है/और होना स्वाभाविक भी है। इनमे से कुछ परिवर्तन सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक होते है। अक्सर यह देखा जाता है कि माता-पिता के द्वारा इन परिवर्तनों को इग्नोर कर दिया जाता है/या फिर सिरियस नहीं लिया जाता है। उन्हें लगता है कि अभी बच्चा छोटा है, और समय के साथ आदतों या व्यवहार ठीक हो जाएगा। लेकिन कई बार होता इसके उल्टा है। अगर सही समय मे हस्तक्षेप नहीं किया जाये तो एक दिन का व्यवहार उसकी आदत बन जाता है और भविष्य मे एक समस्या बन जाता/सकता है।  एक बढ़ती हुई उम्र के बच्चे को अक्सर नहीं पता होता कि उसके अंदर/शरीर मे हो रहे परिवर्तन के साथ किस तरह सामंजसय बैठाना है और ऐसा होने के पीछे क्या कारण है। इस उम्र मे उसे नहीं मालूम होता है कि उसके लिए क्या सही है और क्या गलत। ऐसी स्थिति मे बच्चे कई बार गलत तरह की एक्टिविटी करने लग जाते है, या फिर उनसे जुड़ जाते है, और धीरे धीरे उनका शरीर उन सभी एक्टिविटी को आदि बन जाता है। और जब तक माता-पिता को बच्चों कि उन सभी एक्टिविटी के बारे मे  पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। क...

मैंने इंसानी लिबास मे शैतान देखें है

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मैंने इंसानी लिबास मे शैतान देखें है इंसान नहीं मैंने तो हैवान देखें है डगमगाता रहा ईमान इंसानों का इंसानी वेश भूषा मे बेमान देखें है लूट रहा है इंसान ही बस्ती इंसानों की इन्सानों से ही मैंने इंसान पशेमान देखें है ढूंढ रहा था कूँचों मे भगवान को दैर-ओ-हरम के नाम पर मैंने श्मशान देखें है कौन करेगा पछतावा अपने कर्मों का इबादत पर ही होते मैंने इंतेकाम देखें है इल्म है उस्तादों को, इबादत का उन काजी के हाथों मे मैंने जंगी समान देखें है लिबास ओढ़े खुतबा दे रहे थे खुदा पर, “भूपेंद्र” जो जुबां से मैंने उनकी, निकलते खूनी फरमान देखें है

मान दे माँ, सम्मान दे माँ

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मान दे माँ, सम्मान दे माँ  सृष्टि को वरदान दे माँ दर पर तेरे बैठे, हम सब हे, वाणिश्वरी,  जीवन को हमारे  तान दे माँ हे, आदिशक्ति, ज्ञान की देवी ज्ञान का भंडार दे माँ तिमीर फैला है चारों ओर हे, बुद्धिदात्री ज्ञान की ज्योति का उपहार दे माँ मूर्ख को विद्वान बना दे  हे, वरदायनी समस्त जग को ऐसा वरदान दे माँ  शिवानुजा, मुरारी वल्लभा, तुम कहलाती चारों ओर तुम हो समाती प्रज्वालित तुम ज्ञान का दीपक कर जाती जग को तुम ही चलाती. भूपेंद्र रावत 

एग्जाम फोबिया से निपटने और अच्छे मार्क्स लाने का मूल मंत्र

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एग्जाम शब्द से अच्छे से परिचित होने के बावजूद भी नजाने इस शब्द मे ऐसा कौन सा काला जादू है, जिसका नाम सुनकर बच्चों के मन मे डर पैदा हो जाता है। रात को सोते समय भी एग्जाम के सपने रातों की नींद हराम कर देते है।  जबकि हम सब जानते है कि स्कूल मे दाखिल होने के पश्चात, परीक्षा हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन जाती है।  इसके बावजूद भी परीक्षा शब्द सुनकर हमारे मन मे  चिंता और भय का माहौल पैदा होने लगता है। और कई तरह के प्रश्न हमारे मन मे आने लगते है। जैसे कि परीक्षा मे हम कैसे पास हो पाएंगे,अगर अच्छे मार्क्स नहीं आए तो क्या होगा इत्यादि। इसी चिंता मे वह अपना क्वालिटी समय गवा देते है। परीक्षा के दौरान इस तरह कि मनोदशा छात्रों के परिणाम को भी प्रभावित करती है।  एग्जाम फोबिया कि वजह से छात्र अधिकतर वक़्त तनाव मे होते है जिसके कारण एग्जाम के दौरान या परीक्षा वाले दिन अंजाने मे कई तरह कि गलतियां कर बैठते है। जिससे कि वह परीक्षा मे अच्छा रिज़ल्ट/मार्क्स प्राप्त नहीं कर पाते। इस लेख के माध्यम से हम बताएँगे कि परीक्षा के दिनों मे छात्रों को किस तरह अपने आप को तैयार करना चाहिए जिससे कि उन...