क्या पुनर्जन्म सच है? सुमित्रा–शिवा की रहस्यमयी कहानी और दुनिया के चर्चित पुनर्जन्म के मामले क्या मृत्यु के बाद जीवन समाप्त हो जाता है? या चेतना किसी दूसरे शरीर में फिर से जन्म ले सकती है?** यह प्रश्न हजारों वर्षों से मानव जिज्ञासा का हिस्सा रहा है। भारत जैसे देश में पुनर्जन्म की अवधारणा धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं में बहुत पुरानी है। लेकिन जब कोई व्यक्ति ऐसी बातें बताने लगे जिन्हें वह सामान्य परिस्थितियों में जान ही नहीं सकता था, तब प्रश्न केवल आस्था का नहीं रह जाता—वह शोध और जिज्ञासा का विषय भी बन जाता है। ऐसी ही एक असाधारण घटना उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से सामने आई थी, जिसे आज सुमित्रा सिंह–शिवा त्रिपाठी मामला कहा जाता है। यह मामला इतना असामान्य था कि बाद में पुनर्जन्म के मामलों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने इसे गंभीरता से जाँचा। सुमित्रा और शिवा की कहानी आखिर क्या थी? वर्ष 1985 में इटावा जिले के शरीफपुरा गाँव की रहने वाली सुमित्रा सिंह की तबीयत अचानक खराब हुई। उपलब्ध शोध विवरणों के अनुसार, लगभग 16 जुलाई 1985 के आसपास सुमित्रा ने कथित रूप से कहा था कि उसकी मृत...