गर्मियों का समय था। स्कूल में छुट्टियाँ शुरू होने ही वाली थीं। सभी बच्चे बहुत खुश थे क्योंकि छुट्टियों का मतलब था—घूमना, मस्ती और नानी के घर जाना! लेकिन जैसे हर साल होता था, इस साल भी उनके शिक्षक ने गर्मियों का होमवर्क दिया। छुट्टी से पहले मैडम ने बच्चों से कहा, "बच्चों, छुट्टियों में मस्ती करना ज़रूरी है, लेकिन काम को मत भूलना। मस्ती के साथ-साथ होमवर्क भी समय पर करना है।" सभी बच्चों ने एकसाथ कहा, "हाँ मैम, हम मस्ती भी करेंगे और काम भी।" मैडम मुस्कुराई और सबको छुट्टियों की शुभकामनाएं दीं। सोनू और पिंकी की छुट्टियाँ सोनू और पिंकी अपनी मम्मी के साथ नानी के घर पहुँचे। वहाँ तो जैसे मस्ती की बारिश हो गई—खाना, खेल, टीवी, और ढेर सारी नींद! जब मम्मी ने कहा, "बच्चों, चलो होमवर्क कर लो, फिर खेलना," तो बच्चों ने जवाब दिया, "अरे मम्मी, अभी तो बहुत दिन हैं। कल कर लेंगे।" और ये "कल" हर दिन टलता गया। छुट्टियाँ खत्म होते-होते जब वो घर लौटे, तो मम्मी ने कहा, "अब तो स्कूल शुरू होने वाला है, जल्दी से काम पूरा करो।" फिर क्या था—दिन-रात जागकर जैसे...