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Friday, February 13, 2026

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (2026) – CBSE के नए निर्देश

 कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (2026) – CBSE के नए निर्देश

Central Board of Secondary Education द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान की बोर्ड परीक्षा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बदलाव घोषित किए गए हैं। इन परिवर्तनों को स्पष्ट करने के लिए हाल ही में आयोजित वेबिनार में परीक्षा प्रक्रिया, सेक्शन-वार उत्तर लेखन तथा मानचित्र कार्य (Map Work) से जुड़े आवश्यक निर्देश विस्तार से समझाए गए। सभी विद्यार्थियों के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।




Social Science – Section Wise विभाजन

सामाजिक विज्ञान का प्रश्नपत्र 4 सेक्शन में विभाजित होगा —

  • Section A – History (इतिहास)
  • Section B – Geography (भूगोल)
  • Section C – Political Science (राजनीति विज्ञान)
  • Section D – Economics (अर्थशास्त्र)

Section-Wise उत्तर लिखने के नियम

  • प्रत्येक सेक्शन के उत्तर अलग-अलग लिखें।
  • एक सेक्शन के उत्तर दूसरे सेक्शन में न लिखें।
  • उत्तर पुस्तिका में स्पष्ट रूप से “Section A”, “Section B” आदि लिखकर ही उत्तर प्रारंभ करें।
  • सभी सेक्शन के उत्तर अलग-अलग लिखें, उन्हें आपस में न मिलाएँ (Don’t mix sections).
  • यदि छात्र किसी प्रश्न का उत्तर गलत सेक्शन में लिखता है, तो उस उत्तर का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा और अंक नहीं मिलेंगे।

Map Work से संबंधित नया निर्देश

  • ✔ Map work का उत्तर Geography (Section B) में ही देना अनिवार्य है।
  • ✔ छात्र Map को उत्तर पुस्तिका के बीच में नहीं बांधेंगे (Students will not tie the map between the sheets).
  • ✔ Map को सभी उत्तर पूरा करने के बाद ही अंत में बांधना होगा (They will have to tie the map after completing all answers).
  • यदि Map गलत स्थान पर बांधा गया या सेक्शन मिलाया गया, तो मूल्यांकन में समस्या हो सकती है।

महत्वपूर्ण सावधानियाँ


  • उत्तर लिखते समय पहले सेक्शन का नाम अवश्य लिखें।
  • प्रश्न संख्या स्पष्ट लिखें।
  • उत्तर पुस्तिका व्यवस्थित रखें।
  • Map work साफ और सही स्थान पर लगाएँ।
  • सबमिट करने से पहले जाँच लें कि किसी भी सेक्शन के उत्तर मिले हुए न हों।

सरल शब्दों में समझें

  • Social Science अब 4 अलग-अलग सेक्शन में होगा।
  • हर सेक्शन के उत्तर अलग लिखना अनिवार्य है।
  • सेक्शन मिलाने पर अंक नहीं मिलेंगे।
  • Map को सभी प्र्श्नो के उत्तर देने के पश्चात, अंत में ही बांधना है, बीच में नहीं।

CBSE OSM वेबिनार 2026 : शिक्षको के लिए मूल्यांकन के नियम और निर्देश

CBSE द्वारा कक्षा 12 (2026) की उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच अब On-Screen Marking (OSM) प्रणाली से की जाएगी। इस प्रक्रिया को समझाने के लिए 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को वेबिनार आयोजित किया गया, जिसमें भारत और विदेशों के सभी CBSE संबद्ध विद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षकों को शामिल होना अनिवार्य था।

नीचे पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया गया है —

1️⃣ स्टेप-वाइज मार्किंग क्या है?

  • CBSE हर उत्तर को Marking Scheme के अनुसार छोटे-छोटे “Value Points” में बाँटकर जाँचता है।
  • कैसे अंक दिए जाएंगे?
  • यदि अंतिम उत्तर गलत है लेकिन बीच के स्टेप (फॉर्मूला, गणना आदि) सही हैं, तो उन स्टेप्स के अंक मिलेंगे।
  • हर सही पॉइंट पर ✔ (टिक) लगाया जाता है।
  • हर गलत पॉइंट पर ✖ (क्रॉस) लगाया जाता है।
उदाहरण:
3 अंकों के प्रश्न में 3 अलग-अलग पॉइंट हैं।
छात्र ने 2 सही लिखे → उसे 2/3 अंक मिलेंगे।

ध्यान रखें:
यदि मार्किंग स्कीम में “½ अंक फॉर्मूला के लिए” लिखा है और छात्र ने सही फॉर्मूला लिखा है, तो अंक देना अनिवार्य है।

2️⃣ ओवर-अटेम्प्टेड (Over-Attempted / OA) प्रश्न
  • यदि छात्र ने निर्धारित संख्या से अधिक प्रश्न हल कर दिए:
  • सभी प्रश्नों को जाँचना जरूरी है।
  • सॉफ्टवेयर में “OA” का विकल्प होता है।
  • सिस्टम अपने-आप सबसे अधिक अंक वाले उत्तरों को जोड़ लेगा।
  • शिक्षक को हर उत्तर का मूल्यांकन करना होगा।
3️⃣ दोहराया गया उत्तर (Repeated Answer)
  • यदि छात्र ने एक ही उत्तर दो बार लिखा:
  • दोनों उत्तर जाँचें।
  • जिस उत्तर में अधिक अंक हों, वही गिना जाएगा।
  • दूसरे पर “R” या “REPT” मार्क करें।
4️⃣ खाली पन्नों (Blank Pages) की जाँच
  • OSM में कोई भी पेज खाली छोड़कर सबमिट नहीं किया जा सकता।
  • खाली पेज पर तिरछी रेखा (Diagonal Line) खींचें।
  • “SEEN” या “BLANK” स्टैम्प का उपयोग करें।
  • इससे साबित होता है कि पेज देखा गया है।
5️⃣ महत्वपूर्ण चिन्ह (Symbols)
  • स्थिति चिन्ह अर्थ
  • सही स्टेप अंक मिलेगा
  • गलत स्टेप अंक नहीं
  • प्रश्न नहीं किया NR No Response
  • ज्यादा प्रश्न हल किए OA Best Rule लागू
  • उत्तर दोहराया R / REPT एक ही गिना जाएगा
  • खाली पेज SEEN / Diagonal Line पेज जाँचा गया

6️⃣ 0 और NR में अंतर
  • छात्र ने कोशिश की लेकिन सब गलत → 0 अंक
  • छात्र ने उत्तर ही नहीं लिखा → NR

7️⃣ सबमिट करने से पहले
  • हर प्रश्न के अंक चेक करें।
  • कोई भी सब-पार्ट “Unmarked” न रह जाए।
  • Question-wise total अवश्य मिलाएँ।
8️⃣ नई पहल (2025-26 सत्र से)
  • CBSE ने कक्षा 12 Accountancy में बेसिक (साधारण) कैलकुलेटर की अनुमति पर विचार किया है।
  • केवल जोड़, घटाव, गुणा, भाग और प्रतिशत जैसे साधारण फंक्शन वाले कैलकुलेटर ही मान्य होंगे।
  • OSM प्रणाली से मूल्यांकन तेज, पारदर्शी और त्रुटि-रहित होगा।

Wednesday, February 11, 2026

CBSE कक्षा 12वीं नया OSM (On-Screen Marking) मार्किंग स्कीम

 OSM क्या है?


OSM का पूरा नाम है — On-Screen Marking। इसका मतलब यह है कि

  • अब सीबीएसई कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन (Copy Checking) डिजिटल तरीके से होगा।
  • कॉपियों को पहले स्कैन किया जाएगा और फिर कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखेगा, जहां शिक्षक इसे देखकर मार्क करेंगे।
  • यह 2026 के बोर्ड से लागू हो रहा है।


अब कागज़ की कॉपियाँ हाथ में लेकर नहीं चेक की जाएँगी — सभी मूल्यांकन डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा।


यह बदलाव क्यों किया गया? (उद्देश्य)




CBSE ने OSM क्यों शुरू किया — इसके मुख्य कारण हैं:


✅ ज़्यादा तेज़ और सही मूल्यांकन: डिजिटल सिस्टम में कॉपी की हर पेज़ आसान रूप से जांची जा सकती है, जिससे गलतियाँ कम होंगी।

✅ गलतियाँ कम होंगी: कंप्यूटर वाले सिस्टम से totalling errors (जैसे जोड़-घटाव में गलतियाँ) कम होंगी।

✅ कहां से भी मार्क कर सकते हैं: शिक्षकों को कॉपियाँ अपने स्कूल से ही जांचने का मौका मिलेगा — उन्हें अलग evaluation centre नहीं जाना पड़ेगा।

✅ पारदर्शिता में सुधार: स्कैन कॉपी होने पर हर स्टेप पर रिकॉर्ड रहेगा और बाद में कोई संशय कम होगा।

✅ समय और लागत बचत: कॉपियों को ढोने-ले जाने की ज़रूरत नहीं रहेगी, इसका खर्च बचेगा।


➡️ सीबीएसई इसे एक मॉडर्न और अधिक भरोसेमंद मूल्यांकन प्रक्रिया बनाने का हिस्सा मान रहा है।


👍 OSM के फायदे — छात्रों, शिक्षकों और स्कूलों के लिए

🎓 छात्रों के लिए:


✔️ मार्किंग ज़्यादा सटीक (accurate) हो सकती है।

✔️ परिणाम जल्दी आ सकते हैं।

✔️ कम मानवीय गलतियां (जोड़-घटाव में गलती) होंगी।


👩‍🏫 शिक्षकों के लिए:


✔️ Evaluation के लिए बाहर evaluation centres नहीं जाना पड़ेगा।

✔️ Teachers अपने नियमित स्कूल समय के साथ सहजता से चेक कर सकते हैं।

✔️ जल्दी काम ख़त्म हो सकता है अगर तकनीक सही मिले।


🏫 स्कूलों के लिए:


✔️ समय-बचत और लागत-बचत (कॉपी को ढोने का खर्च गायब)।

✔️ डिजिटल readiness से भविष्य में अन्य प्रक्रियाएँ भी बेहतर हो सकती हैं।


नुकसान या चुनौतियाँ (Concerns)


❗ शुरुआत में तकनीकी परेशानियाँ: स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली सही-से होना जरूरी है।

❗ शिक्षकों के लिए स्क्रीन-सी मार्किंग मुश्किल हो सकती है: बहुत देर तक स्क्रीन देखकर मार्क करना थकावट बढ़ा सकता है।

❗ कुछ का कहना है कि शिक्षक स्क्रीन पर चेकिंग से उतने अनुकूल नहीं होंगे (Reddit जैसी चर्चा में) — खासकर अगर हाथ की लिखावट समझने में मुश्किल हो तो।

❗ अभ्यास की कमी: शुरुआती साल में हर evaluator को डिजिटल सिस्टम से अनुकूल होने में समय लग सकता है।

Saturday, December 27, 2025

रेड पेन से ग्रीन पेन तक: मूल्यांकन की बदलती सोच पर एक विमर्श

रेड पेन से ग्रीन पेन तक: मूल्यांकन की बदलती सोच पर एक विमर्श

भूमिका: एक परिचित दृश्य और एक अनकहा प्रभाव

भारतीय शिक्षा व्यवस्था में वर्षों तक एक दृश्य बेहद सामान्य रहा है—छात्र की उत्तरपुस्तिका, उस पर लाल स्याही के मोटे निशान, जगह-जगह कटे हुए उत्तर और हाशिये पर लिखी गई टिप्पणियाँ। यह केवल कॉपी जाँचने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि शिक्षा की एक गहरी जमी हुई मानसिकता थी।

रेड पेन यहाँ सिर्फ एक रंग नहीं था, बल्कि सत्ता, अनुशासन और निर्णय का प्रतीक था।

आज जब सीबीएसई रेड पेन के प्रयोग से दूरी बनाने की बात करता है, तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल उठते हैं-

क्या केवल पेन का रंग बदल देने से कुछ बदल जाएगा?

जब मूल्यांकन की प्रक्रिया वही है, तो रेड पेन पर आपत्ति क्यों?

इन सवालों के उत्तर रंग में नहीं, बल्कि सोच के बदलाव में छिपे हैं।

पहले की शिक्षा व्यवस्था: डर आधारित अनुशासन

कुछ दशक पहले तक शिक्षा व्यवस्था का मूल ढाँचा बिल्कुल स्पष्ट था। शिक्षक को “अंतिम सत्य” माना जाता था और छात्र का काम था उस सत्य को बिना प्रश्न स्वीकार करना। गलती करना कमजोरी समझी जाती थी और मूल्यांकन का उद्देश्य सीख को सुधारना नहीं, बल्कि छँटनी और नियंत्रण करना था।

रेड पेन इसी सोच का औजार था।

लाल स्याही के निशान यह संदेश देते थे—

“यह गलत है, और गलत होना स्वीकार्य नहीं है।”

यह मान लिया गया था कि डर से अनुशासन आएगा और अनुशासन से सफलता। लेकिन इस प्रक्रिया में यह नहीं देखा गया कि डर के साथ-साथ बच्चे का आत्मविश्वास, जिज्ञासा और सीखने का आनंद भी खत्म हो रहा है।

वर्तमान शिक्षा दृष्टिकोण: सीख केंद्र में, छात्र केंद्र में

आज शिक्षा की दुनिया में दृष्टिकोण बदल रहा है। शिक्षक अब केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि मार्गदर्शक (Facilitator) माना जा रहा है। गलती को कमजोरी नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा समझा जाने लगा है।

मूल्यांकन का उद्देश्य अब यह तय करना नहीं है कि कौन “अच्छा” है और कौन “कमज़ोर”, बल्कि यह देखना है कि छात्र कहाँ खड़ा है और उसे आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है।

इसी संदर्भ में रंग और भाषा भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि वे सीधे छात्र के मनोविज्ञान को प्रभावित करते हैं।

शोध यह स्पष्ट करता है कि

डर से सीख सीमित होती है,

जबकि सुरक्षा और प्रोत्साहन से सीख गहरी और टिकाऊ बनती है।

क्या सच में पेन का रंग फर्क डालता है?

अक्सर यह तर्क दिया जाता है—

“चेकिंग तो चेकिंग है। रेड हो या ग्रीन, गलती तो गलती ही रहेगी।”

यह तर्क तकनीकी रूप से सही, लेकिन मानसिक रूप से अधूरा है।

हाँ, गलती वही रहती है।

हाँ, अंक वही रहते हैं।

लेकिन जो बदलता है, वह है छात्र की अनुभूति।

लाल रंग अवचेतन रूप से खतरे, अस्वीकृति और असफलता का संकेत देता है। बच्चा जब अपनी कॉपी में बार-बार लाल निशान देखता है, तो उसे लगता है कि उसकी पहचान ही उसकी गलतियों से जुड़ गई है।

इसके विपरीत, हरा या नीला रंग संवाद, सुधार और मार्गदर्शन का भाव देता है। वही गलती जब सौम्य रंग और सकारात्मक भाषा में बताई जाती है, तो वह अपमान नहीं, सीख बन जाती है।

यह फर्क कागज़ पर नहीं, मन पर पड़ता है।

तो बदलाव की ज़रूरत क्यों पड़ी?

आज का छात्र केवल किताबों के बोझ से नहीं जूझ रहा, बल्कि

प्रतिस्पर्धा, सोशल प्रेशर, करियर की अनिश्चितता और अपेक्षाओं के दबाव से भी घिरा हुआ है। ऐसे में बार-बार लाल निशानों से भरी कॉपियाँ उसके भीतर यह भावना पैदा करती हैं कि वह “काबिल नहीं है”।

इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। कई बच्चे सीखने के बजाय गलती छुपाने लगते हैं। डर आधारित मूल्यांकन समझ को पीछे छोड़कर रटने की संस्कृति को बढ़ावा देता है।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) इसी समस्या को पहचानते हुए कहती है—

“Assessment should be for learning, not of learning.”

यानी मूल्यांकन सीखने के लिए हो, सीख को जज करने के लिए नहीं।


क्या यह तरीका सच में काम करेगा?

यह मान लेना भोला होगा कि केवल पेन बदल देने से शिक्षा व्यवस्था बदल जाएगी।

सच यह है कि

केवल रंग बदलने से चमत्कार नहीं होगा,

लेकिन यह सोच बदलने की शुरुआत जरूर है।

यदि भाषा वही कठोर रहे,

यदि तुलना और तिरस्कार बना रहे,

यदि ध्यान केवल गलतियों पर ही केंद्रित हो,

तो ग्रीन पेन भी रेड पेन जैसा ही असर करेगा।

लेकिन यदि शिक्षक सुधारात्मक टिप्पणी करें, प्रयास की सराहना करें और गलती के साथ दिशा भी दें, तो वही मूल्यांकन सीखने का सशक्त साधन बन सकता है।

रेड पेन का विरोध, अनुशासन का विरोध नहीं

यह समझना आवश्यक है कि रेड पेन हटाने का अर्थ ढिलापन नहीं है। यह अनुशासन को खत्म करने की नहीं, बल्कि अनुशासन से डर हटाने की कोशिश है।

अनुशासन जब समझ से आता है, तो टिकाऊ होता है।

और जब डर से आता है, तो अस्थायी।

निष्कर्ष: बहस रंग की नहीं, सोच की है

रेड पेन बनाम ग्रीन पेन की बहस दरअसल रंगों की नहीं, दृष्टिकोण की बहस है।

यह स्वीकार करना कि बच्चा मशीन नहीं है,

गलती सीखने की सीढ़ी है,

और मूल्यांकन संवाद हो सकता है—

यही इस बदलाव का असली उद्देश्य है।


“जब शिक्षा डर छोड़ देती है, तभी सीखना शुरू होता है।”

Tuesday, December 16, 2025

CBSE की नई परीक्षा नीति क्या है? (कक्षा 10) CBSE ने निर्णय लिया है कि 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार होगी।

 CBSE की नई परीक्षा नीति क्या है? (कक्षा 10)

CBSE ने निर्णय लिया है कि 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार होगी।

1️⃣ पहली परीक्षा (मुख्य परीक्षा)

  • अनिवार्य (Compulsory)
  • सभी छात्रों को इसमें बैठना होगा
  • आमतौर पर फरवरी–मार्च में होगी
  • पूरे सिलेबस पर आधारित होगी

2️⃣ दूसरी परीक्षा (वैकल्पिक / सुधार परीक्षा)

वैकल्पिक (Optional)

आमतौर पर मई–जून में होगी

इसका उद्देश्य है:

अंक सुधार (Improvement)

कम्पार्टमेंट

विशेष परिस्थितियाँ

 दोनों परीक्षाओं में से बेहतर अंक को अंतिम परिणाम माना जाएगा।

दूसरी परीक्षा में कौन बैठ सकता है?

✔ 1. अंक सुधार (Improvement) के लिए

  • जो छात्र पहली परीक्षा में पास हो चुके हैं
  • लेकिन अपने अंक बढ़ाना चाहते हैं
  • ऐसे छात्र अधिकतम 3 मुख्य विषयों (Maths, Science, SST, Languages) में दूसरी परीक्षा दे सकते हैं

✔ 2. कम्पार्टमेंट वाले छात्र

  • जो छात्र पहली परीक्षा में 1 या 2 विषयों में फेल हो गए हों
  • वे उन्हीं विषयों में दूसरी परीक्षा (Compartment) दे सकते हैं

✔ 3. विशेष परिस्थितियों वाले छात्र

  • खेल प्रतियोगिता के कारण पहली परीक्षा छूट गई हो
  • विंटर-बाउंड स्कूल (जैसे पहाड़ी क्षेत्र)
  • विशेष आवश्यकता वाले छात्र (CWSN)

ऐसे मामलों में CBSE दूसरी परीक्षा की अनुमति दे सकता है

दूसरी परीक्षा में कौन नहीं बैठ सकता?

1. जो पहली परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए

  • अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में 3 या उससे अधिक विषयों में अनुपस्थित रहा
  • उसे Essential Repeat माना जाएगा
  • वह उसी साल दूसरी परीक्षा नहीं दे सकता

2. विषय बाँटकर परीक्षा देने वाले छात्र :- ऐसा नहीं हो सकता कि:

  • कुछ विषय पहली परीक्षा में
  • और कुछ विषय केवल दूसरी परीक्षा में दिए जाएँ

पहली परीक्षा सभी विषयों के लिए अनिवार्य है

📌 महत्वपूर्ण बातें (Exam-Oriented)

✔ पहली परीक्षा हर हाल में देनी होगी

✔ दूसरी परीक्षा केवल सुधार / कम्पार्टमेंट के लिए है

✔ दोनों परीक्षाओं का पूरा सिलेबस समान होगा

✔ बेहतर अंक को ही फाइनल रिज़ल्ट माना जाएगा

✔ इससे छात्रों पर परीक्षा का तनाव कम होगा

🧾 उदाहरण से समझिए

स्थिति                                                                                         दूसरी परीक्षा दे सकता है?

सभी विषयों में पास, अंक बढ़ाना चाहता है                                             ✅ हाँ

1–2 विषयों में फेल                                                                                     ✅ हाँ

3 या अधिक विषयों में अनुपस्थित                                                             ❌ नहीं

पहली परीक्षा पूरी तरह छोड़ दी                                                             ❌ नहीं

खेल/विशेष कारण से परीक्षा छूटी                                                             ✅ हाँ (विशेष अनुमति से)

बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन: अभिभावकों की भूमिका और सही मार्गदर्शन

 बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन: अभिभावकों की भूमिका और सही मार्गदर्शन जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के व्यवहार में परिवर्तन होते रहते हैं। ...