माँ
माँ कोई एक दिन खास नहीं, हर दिन तुम्हारा है इस सृष्टि का तुम से ही तो गुज़ारा है कुछ एक लोगों ने तुम्हें एक दिन मे बांध दिया चस्पा करके फोटो माँ की, बाकी दिन ममता को त्याग दिया शुरुआत तुमसे ही थी, धरा को तुमने बनाया था जीवन कहाँ था तुम बिन, तुम थी, तभी तो जीवन पनप पाया था अंधकारमय पथ पर दीपक तुमने जलाया था दुःख सहे जहाँ के तुमने सारे तब सुख हमने पाया था (24*7)दिन रात बिना थके काम करने का ज़ज्बा तुम्हारे पास कहाँ से आया था ज़िंदगी का पहला अक्षर "माँ " तुमने ही सिखाया था समस्त संसार मेरा सिर्फ माँ तुममे ही समाया था.