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शुरुआती दौर में, निकला था, कारवाँ लेकर

1. सफर में चलते चलते थक गया हूँ मैं,  नाजाने मंज़िल का अंत कहाँ पर है।  शुरुआती दौर में, निकला था, कारवाँ लेकर लेकिन अब खुद में ही सिमट गया हूँ मैं, 2. सफर में कोई अपना मिल, जाये तो अच्छा है। थाम ले हाथ जो अपना,  मुसाफिर वो सच्चा है। कहने को विरासत में, सबको दुनिया मिलती है। इस दुनिया के रंग में जो,  ढल जाये वो अच्छा है।   3. मोहब्बत के सफर में जो, मुसाफिर टिक न पाया है  अदने से सफर मे, उसने फ़क़त दर्द ही पाया है इल्लत थी सदा, उसको मुस्कुराने की   इल्तिफ़ात (मित्रता) ने उसको बे ज़ेर (निर्धन) बनाया है।  4.  हर गलती पर आँसू बहाना अपराध है  हर बार इल्ज़ाम दूसरों पर लगाना अपराध है जो न समझे अहमियत रिश्तों की उस रिश्ते को निष्कर्ष तक ले जाना अपराध है। 5.  बेमतलब कौन किसको याद करता है  बेमतलब कौन किस से बात करता है यहाँ स्वार्थ का मुखौटा ओढ़े बैठे है सब वरना कौन पत्थर को खुदा मान फरियाद करता है  6.  पत्थर अगर, खुदा बन जाये तो अच्छा है  पत्थर अगर, जीने की कला सीखा जाये तो अच्छा है राह के पत्थर को तुच्छ समझने वालों को...

ये दर्द है की सब कुछ भूला देता है

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1 ये  दर्द  है  की  सब  कुछ  भूला  देता  है  जख्मों  को  भी  सीना  सीखा  देता  है जो  सीख  ले  जीना  इन  पलों  को  जिंदगी की राह मे वो तबस्सुम  खिला देता है   2  तेरे संग मुझे सहारा मिल जाता है  जैसे सफीने को किनारा मिल जाता है तुझसे मिलते ही बंज़र जिंदगी  मे  मेरी  मानो जैसे  गुलिस्तां  खिल  जाता  है      

अंधेरे की ओट मे ये जो दिया जलता है

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अंधेरे  की  ओट  मे,  ये  जो  दीया जलता  है दुनिया को रोशन करने की चाह मे खुद को वो छलता है नजाने  किस  भ्रम  मे  वो  रखता  है  खुद  को  जल  कर  खुद  कतरा  कतरा  पिघलता  है   

इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता

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 घर पर आये मुसाफिर को खाली हाथ नहीं भेजा जाता सौदों  मे  हर  बार  स्वार्थ  नहीं  देखा  जाता ज़िंदगी की राह पर मुसाफिर मिल ही जाते है इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता. https://draft.blogger.com/blog/post/edit/3204513329264443755/4287435210650540058

जख्म पर मरहम का लेप लगाने वाले

नहीं मिलता यां कोई गम समेटने के लिए बैठे रहते है, सब दर्द ए गम बेचने के लिए जख्म पर मरहम का लेप लगाने वाले  अक़्सर होते है खरीददार यहाँ उन जख्मों को सींचने के लिए

अपने दर्द की आजमाइश न कर

अपने दर्द की आजमाइश न कर हालातों की लिए फरमाइश न कर लूट लेंगे कश्ती तेरे अपने ही अब अपने दर्द  की और नुमाइश न कर