समय का चक्र: हर कठिन दौर भी स्थायी नहीं होता
समय का चक्र: हर कठिन दौर भी स्थायी नहीं होता जीवन में यदि कोई चीज़ सबसे अधिक रहस्यमयी और शक्तिशाली है, तो वह है — समय। समय एक ऐसे चक्र की तरह है जो निरंतर घूमता रहता है। जैसे पहिया कभी एक जगह स्थिर नहीं रहता, उसी प्रकार समय भी बिना रुके आगे बढ़ता रहता है। इसकी गति न किसी के लिए रुकती है और न ही किसी के लिए बदलती है। समय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह स्वयं को किसी न किसी रूप में दोहराता अवश्य है। हम सभी ने अपने जीवन में ऐसे पल देखे हैं जब सब कुछ अच्छा लग रहा होता है, और कभी ऐसे क्षण भी आते हैं जब लगता है कि मुश्किलों का अंत ही नहीं होगा। कई बार व्यक्ति समय के ऐसे जाल में उलझ जाता है जहाँ उसे हर तरफ अंधेरा दिखाई देने लगता है। वह समस्याओं, चिंताओं और निराशाओं में धीरे-धीरे धँसने लगता है। लेकिन यहाँ समझने वाली बात यह है कि यह भी समय का ही एक हिस्सा है, जो स्थायी नहीं है। भगवद्गीता में एक सुंदर संदेश दिया गया है कि जैसे मौसम बदलते रहते हैं — कभी गर्मी, कभी बारिश और कभी सर्दी — उसी प्रकार हमारे जीवन में भी सुख और दुख आते-जाते रहते हैं। कोई भी परिस्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती। असल प...