बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन: अभिभावकों की भूमिका और सही मार्गदर्शन
बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन: अभिभावकों की भूमिका और सही मार्गदर्शन जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के व्यवहार में परिवर्तन होते रहते हैं। विशेष रूप से बचपन और किशोरावस्था वह समय होता है जब बच्चे के स्वभाव, सोच और व्यवहार में सबसे अधिक बदलाव आते हैं। यह परिवर्तन स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी, क्योंकि इन्हीं बदलावों के माध्यम से बच्चे का मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास होता है। लेकिन हर परिवर्तन बच्चे के विकास के लिए सकारात्मक हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार यह बदलाव नकारात्मक दिशा में भी जा सकते हैं। ऐसे में यह निर्णय करना कि बच्चा सही दिशा में बढ़ रहा है या गलत दिशा में, अभिभावकों की समझ और जागरूकता पर निर्भर करता है। क्यों जरूरी है अभिभावकों का मार्गदर्शन? एक छोटा बच्चा अपने कार्यों और व्यवहार को पूरी तरह से समझने या उनका मूल्यांकन करने में सक्षम नहीं होता। वह अभी जीवन के अनुभवों से सीख रहा होता है। इसलिए वह अच्छे और बुरे के बीच अंतर हमेशा स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाता। यहीं पर परिवार और विशेष रूप से माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अभिभावक बच्चे के पहले शिक्षक और मार्गदर...