सीबीएसई के द्वारा संचालित होने वाली कक्षा 10 और 12 के साथ अन्य कक्षाओं की परीक्षाएं भी जल्द ही शुरू होने जा रही है। ऐसे में हर वर्ष की भांति छात्रों के मन मे परीक्षाओं का बुखार चढ़ जाता है जिसे आम तौर पर एग्ज़ाम फोबिया भी कहा जा सकता है। छात्रों के भीतर कई तरह के संदेह उत्पन्न होने लगते है। जैसे कि अगर उन्हे किसी प्रश्न का जवाब नहीं आया, या फिर अगर उनके नंबर कम आए तो क्या होगा। कई बार उन्हे सपने भी ऐसे ही आते है। जब इस तरह कि मानसिक स्थिति बन जाती है उसे आम तौर पर एग्ज़ाम फोबिया कहा जाता है। लेकिन वास्तविकता मे ऐसा कुछ भी नहीं होता।
अक्सर कई बार यह भी देखा जाता है कि छात्रों की तैयारी पूरी होने के बावजूद भी कई तरह कि अनावश्यक विचार या डर उसके मन मे पनपने लगते है। जिसका प्रभाव छात्रों के आत्मविश्वास मे पड़ता है और वह अपनी काबिलियत/योग्यता के अनुसार प्रदर्शन करने मे नाकाम हो जाते है।
लेकिन ऐसा होता क्यों है? :- छात्रों के भीतर ऐसी स्थिति उस समय उत्पन्न होती है।
- जब वह भविष्य कि बारे मे अधिक सोचने लगता है
- अभिभावकों और समाज का दबाव और अपेक्षाएँ,
- दूसरों से अधिक नंबर लाने की हौड,
- अपने सहपाठी/मित्र से अपनी तुलना करना आदि के कारण
- अभिभावकों और शिक्षक का छात्रों के प्रति नकारात्मक रवैया और उनके द्वारा उनकी तुलना अपने पुराने समय से करना
छात्रों के भीतर इस तरह की भावनाएं उत्पन्न होने के कारण उसके विचार ही उसके ऊपर हावी होने शुरू हो जाते है। शारीरिक और मानसिक रूप से इसका सीधा प्रभाव उसके ऊपर पड़ने लगता है। और वह मानसिक रूप से खुद को कमजोर समझने लगते है।
अब प्रश्न यह उठता है कि अभिभावक और शिक्षक छात्रों के भीतर परीक्षा दौरान होने वाले तनाव/ एग्ज़ाम फोबिया की पहचान कैसे करें ?
1️⃣ शारीरिक लक्षण (Physical Signs)
- परीक्षा का नाम सुनते ही दिल की धड़कन तेज होना
- हाथ-पैर कांपना
- पसीना आना
- सिरदर्द या पेट दर्द
- नींद न आना
2️⃣ मानसिक लक्षण (Emotional & Psychological Signs)
- बार-बार असफलता की कल्पना करना
- “मैं नहीं कर पाऊँगा” जैसी नकारात्मक सोच
- पढ़ा हुआ याद न रहना
- अचानक रोना या चिड़चिड़ापन
3️⃣ व्यवहार में बदलाव (Behavioral Changes)
- पढ़ाई से बचने की कोशिश
- परीक्षा के दिन स्कूल न जाने की इच्छा
- अत्यधिक टालमटोल
- सोशल मीडिया या अन्य गतिविधियों में ज़्यादा समय बिताना
4️⃣ गंभीर संकेत (जब तुरंत ध्यान देना चाहिए)
- घबराहट के दौरे (panic attack जैसा अनुभव)
- आत्मविश्वास पूरी तरह गिर जाना
- परीक्षा को “जीवन-मरण” जैसा समझना
- सिलेबस को छोटे-छोटे भागों में बाँटें
- रोज़ का टाइमटेबल बनाएं (छोटे लक्ष्य तय करें)
- कठिन विषय सुबह पढ़ें
- रिवीजन के लिए अलग समय रखें
- योजना होने से दिमाग को “कंट्रोल” का एहसास होता है और डर कम होता है।
- पुराने प्रश्नपत्र हल करें
- समय सीमा में लिखने की आदत डालें
- लिखकर पढ़ाई करें, सिर्फ पढ़ें नहीं
- जितना अभ्यास, उतना आत्मविश्वास।
- “मैं कर सकता हूँ” जैसे वाक्य रोज़ बोलें
- अपनी पिछली सफलताओं को याद करें
- दूसरों से तुलना न करें
- नकारात्मक सोच फोबिया को बढ़ाती है।
- 6–8 घंटे की नींद
- हल्का व्यायाम या योग
- गहरी साँस लेने का अभ्यास (5 मिनट)
- संतुलित भोजन
- स्वस्थ शरीर, शांत दिमाग।
- डाँटने के बजाय समझें
- परिणाम नहीं, प्रयास पर ध्यान दें
- डराने वाले वाक्य (“फेल हो गए तो…”) न बोलें
- स्कूल काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से मिलें
- बातचीत (Counselling) बहुत मददगार होती है
- जरूरत हो तो विशेषज्ञ की सलाह लें