अधूरी रातों का दर्द
अधूरी रातों का दर्द सुबह की हल्की-हल्की धूप पेड़ों की पत्तियों से छनकर पार्क की हरी घास पर गिर रही थी। पक्षियों की मधुर चहचहाहट वातावरण में एक अलग ही शांति घोल रही थी। रोज़ की तरह उस दिन भी एक बुजुर्ग दंपति अपनी सुबह की सैर के लिए पार्क पहुँचे थे। वर्षों से यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। दो-तीन चक्कर लगाने के बाद उन्हें थोड़ी थकान महसूस हुई, तो वे पास रखी एक बेंच पर बैठ गए। उम्र के इस पड़ाव पर अब शरीर जल्दी थक जाता था, लेकिन उनके पास एक-दूसरे का साथ था, जो हर थकान को हल्का कर देता था। अभी वे आपस में कुछ बातें कर ही रहे थे कि थोड़ी दूरी पर एक नौजवान दंपति आकर बैठ गया। उनके चेहरे पर गहरी चिंता साफ दिखाई दे रही थी। माथे पर खिंची हुई लकीरें और आँखों की बेचैनी किसी अनकहे दर्द की कहानी कह रही थीं। बुजुर्ग दंपति ने एक-दूसरे की ओर देखा। कुछ अनुभव उम्र के साथ बिना बोले ही समझ आने लगते हैं। कहते हैं, सिर के सफेद बाल केवल उम्र नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों की कहानी भी कहते हैं। धीरे-धीरे उनकी बातें बुजुर्ग दंपति के कानों तक पहुँचने लगीं। "डॉक्टर ने कहा है कि इलाज लंबा चलेगा..." य...