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Showing posts from November, 2025

अच्छी आदतें निर्माण में अभिभावकों की भूमिका

 अच्छी आदतें निर्माण में अभिभावकों की भूमिका — बच्चे वही बनते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं अभिभावक हमेशा चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छे गुणों वाले, सभ्य, जिम्मेदार और समाज के योग्य नागरिक बनें। वे यह भी उम्मीद करते हैं कि बच्चे भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकें और स्वयं को सुरक्षित रख सकें। लेकिन यह सोचने वाली बात है कि क्या यह सब बिना अभिभावकों के सहयोग और मार्गदर्शन के संभव है? इसका उत्तर स्पष्ट रूप से—नहीं है। बच्चा एक कोरा पन्ना होता है हर बच्चा जन्म के समय एक कोरे पन्ने की तरह होता है। उस पन्ने पर कैसी बातें लिखी जाएँगी, किस प्रकार की आदतें और व्यवहार उसमें विकसित किए जाएँगे—यह बहुत हद तक अभिभावकों पर निर्भर करता है। हालाँकि यह भी सच है कि बच्चे अपने आस-पास के वातावरण से बहुत कुछ सीखते हैं, लेकिन घर उनके मूल संस्कारों की पहली पाठशाला होता है। बच्चों को रोकना समाधान नहीं, समझाना आवश्यक है आज के समय में बच्चों को हर जगह जाने या हर चीज़ देखने से रोक पाना संभव नहीं है। परंतु सही समय पर सही बातों को समझाकर हम उन्हें उन आदतों से बचा सकते हैं जो उनके व्यवहार ...

शिक्षक की निजता और डिजिटल युग की चुनौतियाँ (जब विद्यार्थी वीडियो/फोटो का गलत उपयोग करें—शिक्षक क्या कदम उठाएँ?)

  शिक्षक की निजता और डिजिटल युग की चुनौतियाँ (जब विद्यार्थी वीडियो/फोटो का गलत उपयोग करें—शिक्षक क्या कदम उठाएँ?) आधुनिक युग में तकनीक हमारे जीवन का मूल आधार बन चुकी है। विशेष रूप से मोबाइल फोन का उपयोग इतना बढ़ गया है कि यह आज की युवा पीढ़ी के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी पढ़ाई में आगे हों या न हों, लेकिन मोबाइल फोन के इस्तेमाल में अव्वल दिखाई देते हैं। घर से लेकर स्कूल कैंपस तक मोबाइल का उपयोग अब आम बात हो गई है। हालाँकि अधिकांश स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध है, फिर भी कई विद्यार्थी इन नियमों का पालन नहीं करते। चिंता की बात यह है कि कुछ विद्यार्थी शिक्षकों की वीडियो या फोटो बिना अनुमति के बनाकर उनका गलत उपयोग करने लगे हैं—मीम बनाना, सोशल मीडिया पर डालना, या जान-बूझकर उनकी छवि खराब करना। ऐसी घटनाओं में सबसे अधिक अपमानित और असुरक्षित महसूस करने वाला व्यक्ति शिक्षक होता है। ऐसे समय में प्रश्न उठता है—इस स्थिति में शिक्षक क्या करें? उनके पास क्या अधिकार हैं? और वे अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें? 1. विद्यालय के नियम औ...

Social Science, Practice set Class - 9

 Section A History (20 marks) 1. Who arote the Spirit of Laws?                                                                  (1) (a) John Locke (b) Jacques Rousseau  (c) Voltaire (d) Montesquieu 2. Choose the correctly matched pair.      (1) (i) Weimar Republic  –  (a) A book written by Hitler (ii) Treaty of Versailles  - (b) Nazi killing operations (iii) Holocaust -  (c)Peace treaty after Ist world was (iv) Mein Kamph  – (d) System of Democratic government a. (i) - a  (ii) - c  (iii) - b (iv) - d          b.  (i) - c  (ii) - d  (iii) - b (iv) - a c. (i) - d  (ii) - c  (iii) - b (iv) - a          d.  (i) - d  (ii) ...

मानसिक शोषण, आत्महत्या और हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी

 मानसिक शोषण, आत्महत्या और हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी हाल ही में दिल्ली मेट्रो में घटी उस दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया, जिसमें मात्र 14 वर्ष के एक बच्चे ने मेट्रो के सामने कूदकर अपनी जान दे दी। यह घटना न सिर्फ भयावह है, बल्कि कई गहरे प्रश्न भी छोड़ जाती है। किसी मासूम बच्चे को आख़िर ऐसा कौन-सा दुःख, दबाव या मानसिक बोझ ने घेर लिया होगा कि उसने जीवन जैसा अनमोल उपहार छोड़ने का फैसला कर लिया? मरने से पहले छोड़े गए पत्र में बच्चे ने अपने स्कूल, अध्यापक और प्रिंसिपल को ज़िम्मेदार ठहराया। उसने लिखा कि उसे पिछले कुछ महीनों से मानसिक शोषण का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन यहाँ एक गंभीर प्रश्न उठता है— क्या किसी बच्चे की गलत हरकतों को रोकना, उसे अनुशासन में रखना या समझाना मानसिक शोषण कहलाता है? या फिर इस मामले में वास्तव में बच्चा किसी गहरी तकलीफ़ से गुज़र रहा था, जिसे समय रहते समझा ही नहीं गया? कहां कमी रह गई? इस घटना की सबसे दुखद सच्चाई यह है कि न तो स्कूल, न शिक्षक, न अभिभावक और न ही समाज—कोई भी अपनी ज़िम्मेदारी से पूरी तरह बच नहीं सकता। 1. स्कूल और शिक्षकों की भूमिका यदि बच्चे ने...

एक साधारण बच्चा, जिसने दुनिया बदल दी

  एक साधारण बच्चा, जिसने दुनिया बदल दी  हम सब विविधता से घिरे हुए हैं। हर कक्षा में हमें तरह-तरह के बच्चे देखने को मिलते हैं—कोई अमीर, कोई गरीब; कोई बहुत तेज, तो कोई थोड़ा धीमा। लेकिन इन सबके बीच एक बात समान होती है—हर बच्चा अपने भीतर एक छिपी हुई प्रतिभा लिए रहता है। आज की कहानी भी ऐसे ही एक बच्चे की है, जिसे पढ़ाई में “आलसी” और “लापरवाह” कहकर अक्सर अनदेखा किया जाता था। उसके स्कूल में शिक्षक भी उससे परेशान रहते थे, और आखिरकार एक दिन उसे स्कूल से निकाल दिया गया। उसकी माँ ने मजबूरी में उसे खेतों में काम पर लगा दिया। लेकिन खेती से उसे बेहद नफ़रत थी। उसका मन तो कहीं और था—इतिहास, विज्ञान और दुनिया को समझने की ओर। वह खेतों में काम करता जरूर था, लेकिन उसका मन हमेशा जिज्ञासा और सवालों से भरा रहता था। फिर भी उसने हार नहीं मानी। परिस्थितियाँ उसके खिलाफ थीं, लेकिन उसका धैर्य उसके साथ था। धीरे-धीरे उसकी पढ़ाई में रुचि बढ़ने लगी। वह देर रात तक बैठकर किताबें पढ़ता, नोट्स बनाता, और खुद से नए-नए प्रयोग करता। समय बीतता गया और किसी तरह उसने बारहवीं की परीक्षा पास कर ली। आगे की पढ़ाई आसान नहीं ...

YUVA AI for ALL : आधुनिक तकनीक के साथ चलने की बेहतरीन पहल

  YUVA AI for ALL : आधुनिक तकनीक के साथ चलने की बेहतरीन पहल आज के समय में स्वयं को आधुनिक तकनीक के साथ अपडेट रखना समय की सबसे बड़ी मांग है। यदि कोई व्यक्ति ज़रा-सा भी पीछे रह जाए, तो उसे तुरंत पिछड़ा हुआ माना जाता है। तकनीक न केवल आपकी स्किल्स को बढ़ाती है, बल्कि आत्मविश्वास भी विकसित करती है। इन्हीं आधुनिक तकनीकों में आज सबसे चर्चा में रहने वाली तकनीक है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI)। हालांकि लोग इसका उपयोग तो कर रहे हैं, लेकिन अधिकतर लोग इसके सही, प्रभावी और सुरक्षित उपयोग से अभी भी पूरी तरह परिचित नहीं हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने आम नागरिकों के लिए AI सीखने की एक शानदार और मुफ़्त पहल की है। यह पहल है — “YUVA AI for ALL” यह कार्यक्रम IndiaAI Mission के तहत शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य है युवाओं सहित हर नागरिक को AI की बुनियादी, सरल और व्यावहारिक समझ प्रदान करना, ताकि वे बदलती तकनीक के साथ आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकें। नीचे इस पाठ्यक्रम की प्रमुख बातें विस्तार से दी जा रही हैं। YUVA AI for ALL — मुख्य विशेषताएँ 1. 100% मुफ्त ऑनलाइन कोर्स यह एक पूरी तरह निशुल्क (free) ऑनलाइन...

आज के समय में बच्चों का बढ़ता संवेदनशील व्यवहार – कारण और समाधान

 आज के समय में बच्चों का बढ़ता संवेदनशील व्यवहार – कारण और समाधान आज के परिवेश में बच्चों का अत्यधिक संवेदनशील होना एक गंभीर और सोचने योग्य विषय बन गया है। छोटी-सी बात पर उनका गुस्सा हो जाना, गलत व्यवहार करना, गाली-गलौज करना या हिंसक प्रतिक्रिया देना — ये सब उस उम्र में हो रहा है, जो उनके खेलने-कूदने, सीखने और खुश रहने की उम्र है। लेकिन ऐसा क्या बदल गया है? बच्चे तो वही हैं, पर उनके व्यवहार में इतना बड़ा अंतर क्यों? पुराने समय का वातावरण – एक सीख कुछ वर्ष पहले का समय देखें, तो बच्चे अधिकांश समय अपने परिवार के साथ बिताते थे। उनके जीवन में प्रतियोगिता कम थी सामाजिक संबंध गहरे थे परिवार में बातचीत अधिक होती थी माता-पिता और बच्चों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत था बच्चों को प्यार, अनुशासन और सुरक्षा तीनों एक साथ मिलते थे। आज का बदलता युग – बदलते व्यवहार की जड़ समय ने तेजी से करवट बदली है। जीवनशैली बदली व्यस्तता बढ़ी तकनीक जीवन का केंद्र बन गई प्रतियोगिता का दबाव बढ़ गया परिवार में साथ बैठकर समय बिताना कम हो गया नतीजतन, बच्चों के लिए भावनाएँ संभालना, असफलता से निपटना और छोटी बातों को सहन...

class - 10 Class Sample Paper - 2

Class Sample Paper - 2 Session - 2025-2026  Section A History (20 marks) 1. In which congress session, was the Non-cooperation programme adopted? (1) (a) Nagpur Session (b) Delhi Session (c) Calcutta Session (d) Madras Session 2. Choose the correctly matched pair. (1) (a) Catholic Reformation – Martin Luther (b) Almanac  - Sub Group within a religion (c) Ballad -  The person who composes the text for printing (d) Johann Gutenberg – Printing Press 3. Choose the correct option to fill in the blank. (1) In the beginning of the 19th century,______. A girl married in a very orthodox household wrote an autobiography called “Amar Jiban” (1) (a) Pandita Ramabai (b) Rashsundari Devi (c) Tarabai Shinde (d) Kailashbashini debi 4. Many expeditions set off in search of El Dorado, the fabled city of ______. a) Silver  b) Emerald c) Diamonds d) Gold 5. What is referred to as Absolutism? (2) Or Why was the Inland E...

शिक्षक की असुरक्षित दुनिया: जिम्मेदार कौन?

 शिक्षक की असुरक्षित दुनिया: जिम्मेदार कौन? 1. प्रस्तावना : “शिक्षक”—एक शब्द, कई अर्थ “शिक्षक”—यह शब्द सुनने में जितना सरल, सम्माननीय और पवित्र लगता है, उसके भीतर उससे कहीं अधिक भार, अपेक्षा और त्याग छिपा है। शिक्षक समाज और विश्व के निर्माता माने जाते हैं, पर आज का वास्तविक परिदृश्य इससे बिल्कुल उलट दिखाई देता है। विशेष रूप से प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत शिक्षक अपनी ही सुरक्षा और अस्तित्व के लिए संघर्ष करते दिखते हैं। 2. वर्तमान परिप्रेक्ष्य : शिक्षक बने असुरक्षा के प्रतीक आज शिक्षक होना जितना सम्मानजनक है, उतना ही जोखिम भरा भी। स्कूलों में शिक्षकों पर बढ़ते हमले, गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार, और कई मामलों में हथियारों से हमला— अब दुर्लभ घटनाएँ नहीं रहीं, बल्कि एक खतरनाक सामान्य-सी बात बन गई हैं। वे स्कूल जहाँ बच्चों का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए, वहाँ शिक्षक स्वयं असुरक्षित हो चुके हैं। 3. शिक्षक से अपेक्षा: “चुप रहो… क्योंकि तुम शिक्षक हो” समाज का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है— अपराध का शिकार शिक्षक होता है, और चुप रहने की अपेक्षा भी उसी से की जाती है। उसे कहा जाता है: “तुम शिक्षक हो, ...

अभिभावकों की अपेक्षाएँ और बदलता परिदृश्य

 अभिभावकों की अपेक्षाएँ और बदलता परिदृश्य आज के सामाजिक परिदृश्य में एक विरोधाभास स्पष्ट दिखाई देता है—अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों के प्रति नकारात्मक रवैया रखते हुए भी उनसे अत्यधिक अपेक्षाएँ पाल लेते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इन अपेक्षाओं की कोई सीमा नहीं होती। पढ़ाई हो, खेल-कूद हो, या फिर किसी भी प्रतियोगिता में भागीदारी—हर क्षेत्र में वे बच्चों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद करते हैं। लेकिन जब बच्चा किसी कारणवश अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता, अपने सहपाठियों से पीछे रह जाता है या पढ़ाई में उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं ला पाता, तो जिम्मेदारी लेने की बजाय अभिभावक दोष सीधे स्कूल और अध्यापकों के सिर मढ़ देते हैं। बच्चों की हर असफलता का ठीकरा शिक्षक के सिर पर फोड़ना आज बहुत आम हो गया है। अभिभावकों का अक्सर यही तर्क होता है— “हम फीस देते हैं, ट्यूशन भेजते हैं, इतना पैसा खर्च करते हैं, फिर भी बच्चा अच्छा प्रदर्शन क्यों नहीं कर पा रहा?” लेकिन इस तर्क में एक महत्वपूर्ण सच्चाई गुम हो जाती है— पैसा शिक्षा खरीद सकता है, पर संस्कार नहीं। साधन उपलब्ध करा सकता है, पर सीख नहीं। बच्चों के भीतर ...

Class 9 NEW PATTERN SAMPLE PAPER - 2

 Class 9 - NEW PATTERN SAMPLE PAPER (2025-2026) Time Allowed: 3 Hours Maximum Marks: 80  General Instructions: 1. There are 38 questions in the question paper. All questions are compulsory. 2. The question paper has four sections – A History, B-Economics, C-Political Science, and D- Geography.  History -                                                                                                                         20 Marks Question Paper**                                              ...

परंपराओं की बेड़ियों में बँधी आज़ादी

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सामाजिक और सांस्कृतिक  परंपराओं की बेड़ियों मे बांधकर  महिलाओं को दी गयी आजादी,  और निर्धारित की गयी  उनकी सीमाएं।  पंख कुतर कर उन्हे  किया गया कमजोर और  रखा गया वंचित  उन्हें शिक्षा और समानता के  उन सभी अधिकारों से जो  दिये गए पुरुषों को जन्म से।  घर की चार दीवारी मे  सिमटी महिलाओं को  कहा गया संस्कारी।  और बैठाया गया डर  रूढ़िवादी सोच का कि  पढ़ने से हो जाती हैं महिलाएं, विधवा। भूपेंद्र रावत 

Previous Sample paper- 1 CLASS-X SOCIAL SCIENCE

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Previous Sample paper- 1 CLASS-X SOCIAL SCIENCE Time: 3 Hours Max.                                                                                                                     Marks: 80 General Instructions: i. Question paper comprises five Sections – A, B, C, D and E. There are 37 questions in the question paper. All questions are compulsory. ii. Section A – From question 1 to 20 are MCQs of 1 mark each. iii. Section B – Question no. 21 to 24 are Very Short Answer Type Questions, carrying 2 marks each. Answer to each question should not exceed 40 words. iv. Section C contains Q.25to Q.29 are Short Answer Type Questions, carrying 3 marks each. Answer to each question should not ex...