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Class 9 Social Science Chapter 1 Worksheet with Answers | NCERT 2026–27 | MCQs, Fill Ups, True/False, Case Study & Long Answer Questions

 Class 9 Social Science Worksheet Chapter 1: Understanding Social Science https://pin.it/4JrTYewdm (NCERT 2026–27) Section A – Multiple Choice Questions (1 × 15 = 15 Marks) 1. Social Science is mainly the systematic study of A. Plants B. Human society C. Animals D. Machines 2. Which discipline studies the relationship between people and their environment? A. Economics B. History C. Geography D. Political Science 3. Which of the following is NOT a discipline of Social Science? A. Geography B. Economics C. Chemistry D. Political Science 4. The idea of Vasudhaiva Kutumbakam means A. Nature is supreme B. The World is One Family C. Earth has five elements D. Unity in villages 5. GIS stands for A. Geographical Information System B. Global Information Study C. Government Information Survey D. Geographical Internet Service 6. Which historical source includes coins? A. Literary B. Archaeological C. Numismatic D. Epigraphic 7. Panchayati Raj promotes A. Foreign trade B. Local self-governmen...

कर्म का जादुई पौधा

 कर्म का जादुई पौधा  बहुत समय पहले की बात है। धरती पर जब मनुष्यों का जन्म हुआ, तो ईश्वर ने हर बच्चे और बड़े को एक-एक जादुई पौधा दिया। यह पौधा बहुत अनोखा था। इसमें न खाद डालनी पड़ती थी और न पानी देना पड़ता था। लेकिन एक बात कोई नहीं जानता था— यह पौधा कर्मों से बढ़ता था। जो बच्चा सच बोलता, मदद करता और अच्छा काम करता, उसका पौधा धीरे-धीरे बड़ा होने लगता। और जो झगड़ा करता, झूठ बोलता और दूसरों से जलता, उसका पौधा छोटा ही रह जाता। लोग एक-दूसरे से पूछते— “तुम्हारा पौधा इतना हरा-भरा कैसे है?” “कौन-सी खाद डालते हो?” कुछ लोग दिखावा करने लगे। वे सबके सामने अच्छे बनते, मंदिर भी जाते, लेकिन मन में जलन और स्वार्थ रखते। उनका पौधा धीरे-धीरे सूखने लगा। वहीं कुछ बच्चे ऐसे भी थे, जो चुपचाप अच्छे काम करते थे। वे किसी को बताते नहीं थे। वे सच बोलते, बड़ों का सम्मान करते और जरूरतमंदों की मदद करते। उनका पौधा रोज़ बड़ा होता गया और एक सुंदर पेड़ बन गया। एक दिन लोग बहुत सोच में पड़ गए। “हम तो बहुत कोशिश करते हैं, फिर भी हमारा पौधा सूख गया। और वे बच्चे बिना कुछ किए इतना बड़ा पेड़ कैसे बना रहे हैं?” उसी रात ...

इंसानियत का असली अर्थ

 इंसानियत का असली अर्थ एक सुहावनी सुबह थी। आज घर के सभी सदस्यों की छुट्टी एक साथ पड़ी थी। सबने तय किया कि आज का दिन घर पर न बिताकर कहीं बाहर घूमने चलेंगे। काफी सोच-विचार के बाद सबने निश्चय किया कि वे आज विभिन्न धर्मस्थलों के दर्शन करने जाएंगे। सुबह-सुबह सब तैयार हुए, प्रसन्न मन से निकले और दिनभर अलग-अलग मंदिरों और तीर्थस्थलों में घूमते रहे। हर कोई अपने-अपने तरीके से आनंद ले रहा था। परंतु परिवार का सबसे छोटा सदस्य—आरव—चुपचाप सब कुछ देख रहा था। वह देख रहा था कि मंदिरों के बाहर लोग बड़ी-बड़ी गाड़ियों से उतरते हैं, महँगे कपड़े पहने हुए हैं, लेकिन जो गरीब और जरूरतमंद वहाँ खड़े थे, कोई उनकी ओर देखना तक पसंद नहीं करता। कुछ लोग तो उन्हें दुत्कार देते, मज़ाक उड़ाते, और बिना वजह अपमानित करते। आरव का मन यह सब देखकर बहुत बेचैन हो उठा। उसे लगा जैसे इंसानियत कहीं खो गई है। शाम को सब लोग घर लौटे। सभी खुश थे कि दिन अच्छा बीता, पर आरव का चेहरा उदास था। दादी ने पूछा, “क्या हुआ बेटा? तुम तो पूरे दिन चुप-चुप रहे, घूमने में मज़ा नहीं आया क्या?” आरव कुछ देर चुप रहा, फिर बोला — “दादी, मंदिरों में लोग भगव...

"कल कभी नहीं आता"

गर्मियों का समय था। स्कूल में छुट्टियाँ शुरू होने ही वाली थीं। सभी बच्चे बहुत खुश थे क्योंकि छुट्टियों का मतलब था—घूमना, मस्ती और नानी के घर जाना! लेकिन जैसे हर साल होता था, इस साल भी उनके शिक्षक ने गर्मियों का होमवर्क दिया। छुट्टी से पहले मैडम ने बच्चों से कहा, "बच्चों, छुट्टियों में मस्ती करना ज़रूरी है, लेकिन काम को मत भूलना। मस्ती के साथ-साथ होमवर्क भी समय पर करना है।" सभी बच्चों ने एकसाथ कहा, "हाँ मैम, हम मस्ती भी करेंगे और काम भी।" मैडम मुस्कुराई और सबको छुट्टियों की शुभकामनाएं दीं। सोनू और पिंकी की छुट्टियाँ सोनू और पिंकी अपनी मम्मी के साथ नानी के घर पहुँचे। वहाँ तो जैसे मस्ती की बारिश हो गई—खाना, खेल, टीवी, और ढेर सारी नींद! जब मम्मी ने कहा, "बच्चों, चलो होमवर्क कर लो, फिर खेलना," तो बच्चों ने जवाब दिया, "अरे मम्मी, अभी तो बहुत दिन हैं। कल कर लेंगे।" और ये "कल" हर दिन टलता गया। छुट्टियाँ खत्म होते-होते जब वो घर लौटे, तो मम्मी ने कहा, "अब तो स्कूल शुरू होने वाला है, जल्दी से काम पूरा करो।" फिर क्या था—दिन-रात जागकर जैसे...