कर्म का जादुई पौधा
बहुत समय पहले की बात है। धरती पर जब मनुष्यों का जन्म हुआ, तो ईश्वर ने हर बच्चे और बड़े को एक-एक जादुई पौधा दिया।
यह पौधा बहुत अनोखा था।
इसमें न खाद डालनी पड़ती थी और न पानी देना पड़ता था।
लेकिन एक बात कोई नहीं जानता था—
यह पौधा कर्मों से बढ़ता था।
जो बच्चा सच बोलता, मदद करता और अच्छा काम करता, उसका पौधा धीरे-धीरे बड़ा होने लगता।
और जो झगड़ा करता, झूठ बोलता और दूसरों से जलता, उसका पौधा छोटा ही रह जाता।
लोग एक-दूसरे से पूछते—
“तुम्हारा पौधा इतना हरा-भरा कैसे है?”
“कौन-सी खाद डालते हो?”
कुछ लोग दिखावा करने लगे।
वे सबके सामने अच्छे बनते, मंदिर भी जाते, लेकिन मन में जलन और स्वार्थ रखते।
उनका पौधा धीरे-धीरे सूखने लगा।
वहीं कुछ बच्चे ऐसे भी थे, जो चुपचाप अच्छे काम करते थे।
वे किसी को बताते नहीं थे।
वे सच बोलते, बड़ों का सम्मान करते और जरूरतमंदों की मदद करते।
उनका पौधा रोज़ बड़ा होता गया और एक सुंदर पेड़ बन गया।
एक दिन लोग बहुत सोच में पड़ गए।
“हम तो बहुत कोशिश करते हैं, फिर भी हमारा पौधा सूख गया।
और वे बच्चे बिना कुछ किए इतना बड़ा पेड़ कैसे बना रहे हैं?”
उसी रात ईश्वर उनके सपने में आए।
लोगों ने पूछा—
“भगवान जी, ऐसा क्यों?”
ईश्वर मुस्कुराए और बोले—
“बच्चो, यह कर्म का पौधा है।
यह दिखावे से नहीं, अच्छे कामों से बढ़ता है।
सच, प्यार और मदद इसका पानी हैं।
और झूठ, जलन और स्वार्थ इसे सुखा देते हैं।”
यह सुनकर सभी बच्चों को समझ आ गया।
अगले दिन से उन्होंने अच्छे कर्म करने शुरू कर दिए।
धीरे-धीरे उनके पौधे भी फिर से हरे-भरे हो गए।
सीख
अच्छे कर्म ही हमारी सच्ची पहचान हैं।
दिखावे से नहीं, सच्चे दिल से किए गए काम ही फल देते हैं।