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वक़्त ने कभी नहीं ओढ़े मुखोटे

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 सुना है, अक्सर लोगों से, कि समय बदल गया है, लेकिन उन्हें कौन समझाए कि वक़्त तो जैसा था, आज भी वैसा ही है बदल गया है चेहरा, नियत, और इरादा इंसानो का वक़्त ने कभी नहीं बदला अपना मार्ग तनिक सा भी बल्कि इंसानो ने बदल लिया स्वयं को अपनी जरूरतों के अनुसार, और दोषी ठहरा दिया, वक़्त को वक़्त ने कभी नहीं ओढ़े मुखोटे,  बल्कि वक़्त ने पढ़ाया पाठ और मार्ग से भूले - बिसरे लोगों को दिखाया आईना। भूपेंद्र रावत

Question Paper – Chapter 1: Variations in Psychological Attributes

  Question Paper – Chapter 1: Variations in Psychological Attributes Time: 1 hour 30 minutes Section A – Objective Type Questions (1 mark each) (Total: 10 marks) A. Multiple Choice Questions (MCQs) – (1 × 5 = 5 marks) 1. Who proposed the Two-Factor theory of intelligence? a) J.P. Guilford b) Charles Spearman c) Robert Sternberg d) Alfred Binet 2. The term IQ was first coined by — a) Lewis Terman b) Alfred Binet c) William Stern d) David Wechsler 3. The component of Triarchic theory of intelligence that deals with practical problem-solving is — a) Analytical b) Creative c) Practical d) Emotional 4. Emotional intelligence was popularised by — a) Mayer and Salovey b) Gardner c) Goleman d) Sternberg 5. A child with an IQ below 70 is generally considered — a) Gifted b) Average c) Intellectually disabled d) Creative B. Fill in the Blanks – (1 × 3 = 3 marks) Intelligence tests that measure potential are known as ___________ tests. The IQ formula is given by ___________. Creativity is the ...

"पीढ़ियों के बीच संवाद की ज़रूरत"

 "पीढ़ियों के बीच संवाद की ज़रूरत" आज के समय में अक्सर माता-पिता और शिक्षक यह शिकायत करते नज़र आते हैं कि “आजकल के बच्चे बड़ों की बात नहीं मानते।” घर में भी यही स्थिति होती है और स्कूल में भी। कभी कोई छात्र माता-पिता की बातों को अनसुना कर देता है, तो कभी शिक्षक की सलाह को हल्के में ले लेता है। ऐसे में बड़े अकसर यह तुलना करने लगते हैं — “हमारे ज़माने में तो हम बड़ों की आज्ञा का पालन करते थे, इतने बदतमीज़ नहीं थे।” पर क्या यह तुलना सचमुच उचित है? क्या हमने अपने युवावस्था के दिनों को भुला दिया है? युवावस्था – एक उफनता सागर हर इंसान अपने किशोर या युवा दिनों में एक अलग ही दुनिया में जीता है — जहाँ जोश होता है, सपने होते हैं, और खुद को समझने की चाह होती है। इस उम्र में बच्चा सिर्फ़ “ना” सुनना नहीं चाहता, वह यह जानना चाहता है कि “क्यों ना?”वह सवाल करता है, बहस करता है, और अपनी पहचान तलाशता है। यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक मानसिक विकास की प्रक्रिया है। घर का वातावरण – पहली पाठशाला माता-पिता का रोल यहाँ सबसे अहम है। अगर बच्चा आपकी बात नहीं सुन रहा, तो शायद उसने सुना ही नहीं — ...

नाटक : मोबाइल का जादू

 नाटक : मोबाइल का जादू पात्र: मम्मी पापा रवि (बेटा) कथावाचक (Narrator) दृश्य 1: सुबह का घर का दृश्य सुबह का समय है। मम्मी रसोई में काम करने जा रही हैं और रवि पढ़ने बैठा है। लेकिन आज कुछ अलग होने वाला है... मम्मी (धीरे, प्यार से): बेटा रवि, तुम पढ़ लो। मैं तब तक रसोई का काम कर लेती हूँ। रवि (खुश होकर): ठीक है मम्मी, आप जल्दी से काम खत्म कर लेना, फिर मैं आपसे सवाल पूछूँगा। (रवि किताब लेकर पढ़ने लगता है। मम्मी काम शुरू करने की जगह मोबाइल उठा लेती हैं और स्क्रॉल करने लगती हैं। कुछ मज़ेदार रील देखकर हँसती हैं।) मम्मी (हँसते हुए): अरे वाह! कितना प्यारा डांस किया बच्चे ने... एक और वीडियो देखती हूँ। मम्मी रसोई का काम भूल चुकी हैं, और मोबाइल का जादू उन पर चढ़ चुका है! (थोड़ी देर बाद रवि आता है।) रवि (धीरे): मम्मी, काम हो गया आपका? मम्मी (थोड़ी घबराई): अरे बेटा, कौन सा काम? रवि (मुस्कराते हुए): वही जो आप बोल रही थीं — “बेटा, तुम पढ़ लो, मैं रसोई का काम कर लेती हूँ।” मैं तो पढ़ भी चुका, पर आप अभी तक फोन में हैं। मम्मी (संकोच से): अरे हाँ! मुझे तो पता ही नहीं चला कि कितना समय निकल गया। रवि (हल...

"बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं"

 "बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं" अक्सर हम सभी यह चाहते हैं कि हमारे बच्चे संस्कारी, जिम्मेदार और अच्छी आदतों वाले बनें। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा जीवन में सफलता प्राप्त करे और समाज में सम्मान पाए। पर क्या हमने कभी ठहरकर यह सोचा है कि जिन अच्छी आदतों को हम अपने बच्चों में विकसित करना चाहते हैं, क्या हम स्वयं उन आदतों का पालन करते हैं? यह बात समझना बहुत आवश्यक है कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं, न कि जो उन्हें केवल सिखाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई माता-पिता अपने बच्चे को ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं लेकिन खुद छोटी-छोटी बातों में झूठ बोलते हैं — जैसे फोन पर कहना “बोल देना मैं घर पर नहीं हूँ” — तो बच्चा इसे एक स्वाभाविक व्यवहार मान लेता है। आजकल एक जीवंत उदाहरण आम देखने को मिलता है — कई माता-पिता अपने कार्य स्वयं नहीं करते, पर वही कार्य अपने छोटे बच्चों पर थोप देते हैं। प्रारंभ में बच्चा प्यार या डर के कारण वह काम कर देता है, पर जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, वह यह महसूस करने लगता है कि उसके माता-पिता तो आराम से बैठकर फोन चला रहे हैं और उस पर काम का ...

“एक मछली से नहीं, कई अच्छी मछलियों से बदलता है तालाब”

“एक मछली से नहीं, कई अच्छी मछलियों से बदलता है तालाब” यह कहावत तो हम सबने सुनी है — "एक मछली सारे तालाब को मैला कर देती है" । इसका मतलब होता है कि अगर किसी समाज या समूह में एक भी व्यक्ति गलत रास्ते पर चल पड़े, तो उसके बुरे कर्मों का असर पूरे समाज पर पड़ता है। लेकिन क्या कभी हमने सोचा है कि अगर यही कहावत उलट दी जाए? अगर "एक अच्छी मछली पूरे तालाब को साफ कर सकती है" , तो क्या समाज बेहतर नहीं बन सकता? असल में, बात केवल एक मछली की नहीं है, बात हमारे सोचने और करने के तरीके की है। हम अक्सर दूसरों की गलतियों पर उंगली उठाने में तो बहुत तेज़ होते हैं, लेकिन जब अच्छाई फैलाने की बात आती है तो पीछे हट जाते हैं। हम यह सोचते हैं कि "मैं अकेला क्या कर लूंगा?" — और यही सोच समाज को आगे बढ़ने से रोकती है। अगर एक नकारात्मक व्यक्ति अपने आसपास के माहौल को बिगाड़ सकता है, तो दस सकारात्मक व्यक्ति मिलकर उसे सुधार क्यों नहीं सकते? समस्या यह नहीं है कि बुराई ताकतवर है, बल्कि यह है कि अच्छे लोग अक्सर चुप रहते हैं, निष्क्रिय रहते हैं। जब अच्छाई आवाज़ नहीं उठाती, तो बुराई अपने आप हावी ...

Chapter: Democratic Rights – (Class 9 Civics)

 Chapter: Democratic Rights – (Class 9 Civics) 1. Life Without Rights Rights are what make us free and equal in a democracy. Without rights, people can be exploited, tortured, or silenced. (a) Prison in Guantanamo Bay (USA) The US government kept hundreds of prisoners (mostly from Afghanistan/Iraq) in Guantanamo Bay, a military camp. Prisoners were suspected terrorists — but no fair trial was given. They were tortured and detained for years without being proven guilty. Even their families were not informed about their location. This shows life without rights — when people are treated as if they have no human value. (b) Citizens’ Rights in Saudi Arabia Saudi Arabia is a monarchy — no elected parliament. The King is all-powerful: he can change laws and decisions at will. No freedom of speech or religion – criticism of the government is punished. Women’s rights are limited: they need permission from male guardians for many things. This shows lack of political and personal freedoms. (c...