Friday, November 14, 2025

परंपराओं की बेड़ियों में बँधी आज़ादी

सामाजिक और सांस्कृतिक 

परंपराओं की बेड़ियों मे बांधकर 

महिलाओं को दी गयी आजादी, 

और निर्धारित की गयी 

उनकी सीमाएं। 

पंख कुतर कर उन्हे 

किया गया कमजोर और 

रखा गया वंचित 



उन्हें शिक्षा और समानता के 

उन सभी अधिकारों से जो 

दिये गए पुरुषों को जन्म से। 

घर की चार दीवारी मे 

सिमटी महिलाओं को 

कहा गया संस्कारी। 

और बैठाया गया डर 

रूढ़िवादी सोच का कि 

पढ़ने से हो जाती हैं महिलाएं, विधवा।


भूपेंद्र रावत 

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