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CBSE NISHTHA Courses 2026-27: 5 New Courses for Teachers | Enrollment Last Date 31 August 2026

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 CBSE NISHTHA Courses 2026-27: 5 New Courses for Teachers | Enrollment Last Date 31 August 2026 CBSE has released Circular No. TRG-15/2026 dated 13 August 2026 regarding enrollment in NISHTHA Courses for the 2026-27 Cycle 1. Teachers and School Heads can enroll in courses such as NISHTHA FLN, ECCE, Cyber Hygiene, E-Waste, Action Research and Catch the Rain. 📅 Enrollment closes: 31 August 2026 📚 Course cycle: April–October 2026 🎓 For: Teachers & School Heads 📜 Certificate/Professional Development opportunity 👉 Want to know the complete course list, eligibility, important dates and official enrollment link? Read the full CBSE Circular on https://www.cbse.gov.in/cbsenew/documents/15_Circular_2026_13082026.pdf

शिक्षक: समाज के निर्माता या कठपुतली?

  शिक्षक: समाज के निर्माता या कठपुतली? समाज में स्कूल जैसी संस्थाओं का निर्माण इसलिए हुआ था ताकि आने वाली पीढ़ियाँ शिक्षित होकर एक बेहतर नागरिक बनें और सही मार्ग पर चल सकें। इन संस्थाओं की आत्मा शिक्षक ही थे, हैं, और रहेंगे।  क्योंकि शिक्षा का दायित्व उन्हीं के कंधों पर रखा गया है। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले ही नहीं, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को संवारने वाले मार्गदर्शक भी हैं। लेकिन आज की परिस्थितियाँ चिंताजनक हैं। वर्षों से जिस उद्देश्य के लिए स्कूल और शिक्षक कार्यरत रहे, वह अब धीरे-धीरे धूमिल होता जा रहा है। शिक्षक की सीमाएँ और बदलता परिवेश आज "बाल केन्द्रित शिक्षा" (Child-Centered Education) के नाम पर शिक्षक की भूमिका को सीमित कर दिया गया है। यह सही है कि शिक्षा का केन्द्र छात्र होना चाहिए, परंतु जब छात्र और समाज इसका गलत अर्थ निकालने लगें तो समस्या गंभीर हो जाती है। आज शिक्षक कुछ कहने से डरते हैं—कहीं विद्यार्थी नाराज़ न हो जाए, कहीं अभिभावक शिकायत लेकर न आ जाएँ, या कहीं समाज उन्हें कठघरे में खड़ा न कर दे। स्थिति इतनी विचलित करने वाली हो गई...

जीत गए नेता जी चुनाव में

  जीत गए नेता जी चुनाव में जीत गए नेता जी चुनाव में, ढोल-नगाड़ों की थाप में, नारे गूंजे, झंडे लहराए, उम्मीदों के दीप जलाए। बदलते आंकड़ों के संग बदलते चेहरों की मुस्कान, जनता सुनती रही हर बार, मंचो से वादों की बौछार। और अंत में... शेष रह गए झूठे वादे, और खोखली बाते मतदाताओं की, टूटती उम्मीदें सड़कें वहीं, गड्ढे वहीं, बस चुनावों में भर दिए गए काग़ज़ी गड्डे।

स्त्री का घर

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 स्त्री का घर ईंट–ईंट जोड़कर उसने, आंसुओं से गारा बनाया, रक्त और पसीने से गढ़ी दीवारें, फिर भी मेहनताना मिला— कौड़े, ताने और तिरस्कार। तन की थकान, मन की पीड़ा, के साथ दर्द से गूंजता, हर स्वर फिर भी त्यागा नहीं उसने अपना घर, क्योंकि उस घर की सांसों में बसा था, उसका अस्तित्व । पुरुष हमेशा की तरह रहे केंद्र में, स्त्री को ठुकराते, दबाते, प्रगतिशीलता के नकाब तले बरसाते रहे उपेक्षा की चोट। समानता के नारे, संसद और चैनलों में गूंजे, पर जमीनी धरातल पर स्त्री धकेली जाती रही गर्त में, बनाई जाती रही वस्तु, सिर्फ उपभोग की । हक़ीक़त में बदलाव था  कल्पनाओं से परे, जैसे होती है कहानी परियों की टूटते तारों की।    इन्सानो की बस्ती मे  बदलाव का झूठा सपना लिए स्त्री हर बार,होती रही शिकार,  वासना का, कभी घरों मे तो कभी समाज मे    छलनी होते समाज मे  बिखरती गयी उम्मीदें  और शेष रहा, दिलासा। जख्म से सने जिस्म,  दबी और कुचली  हुई आवाज़ के साथ  फिर भी उठती,  रही स्त्री हर बार  अपने आँचल में नए सूरज की रोशनी लिए। इतिहास गवाह है कि  घर क...

इंसानियत को तार-तार करने वाले जघन्य अपराध और समाज की ज़िम्मेदारी

 इंसानियत को तार-तार करने वाले जघन्य अपराध और समाज की ज़िम्मेदारी आज के समय में जब हम अख़बार खोलते हैं या न्यूज़ चैनल देखते हैं, तो कई बार दिल दहला देने वाली खबरें सामने आती हैं। नाबालिग बच्चों के साथ बलात्कार, अपने स्वार्थ के लिए किसी की बेरहमी से हत्या, और तरह-तरह के अपराध... ये सब इंसानियत को शर्मसार कर देते हैं। सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसे अपराध किस श्रेणी में आते हैं? इनके लिए कैसी सज़ा होनी चाहिए ताकि अपराधी अपराध करने से पहले हज़ार बार सोचें? और सबसे ज़रूरी – क्या हम और आप, समाज के नागरिक होने के नाते, इन अपराधों को रोक सकते हैं? 1. ये अपराध किस श्रेणी में आते हैं? ऐसे अपराध जघन्य अपराध (Heinous Crimes) कहलाते हैं। नाबालिगों से रेप किसी का स्वार्थ के लिए मर्डर या दूसरों को शारीरिक व मानसिक रूप से गंभीर हानि पहुँचाना ये सभी ऐसे अपराध हैं जो न केवल एक व्यक्ति के खिलाफ होते हैं, बल्कि पूरे समाज और उसकी नैतिकता को चोट पहुँचाते हैं। 2. कैसी होनी चाहिए सज़ा? लोग अक्सर कहते हैं कि “कड़ी सज़ा होनी चाहिए”। पर सवाल है, कैसी सज़ा? कठोर दंड – रेप और मर्डर जैसे अपराधों में मृत्युदंड या आ...

कक्षा 12 में मनोविज्ञान चुनने का भविष्य और करियर स्कोप

 कक्षा 12 में मनोविज्ञान चुनने का भविष्य और करियर स्कोप आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और व्यवहारिक समझ की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में मनोविज्ञान (Psychology) सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि भविष्य की असीम संभावनाओं का द्वार है।  मनोविज्ञान पढ़ने के बाद किन क्षेत्रों में प्रवेश की संभावना बढ़ती है? कक्षा 12 में मनोविज्ञान लेने के बाद छात्र निम्नलिखित क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं: क्लिनिकल साइकोलॉजी (Clinical Psychology) – मानसिक रोगों, डिप्रेशन, एंग्जाइटी, ट्रॉमा आदि का इलाज और काउंसलिंग। काउंसलिंग (Counseling Psychology) – स्कूल, कॉलेज या परिवार में मार्गदर्शन और जीवन की समस्याओं के समाधान देना। मनोविश्लेषण (Psychoanalysis) – गहरी मानसिक प्रक्रियाओं और अवचेतन मन को समझना। ऑर्गेनाइजेशनल/इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी – कंपनियों और संगठनों में कर्मचारियों की मानसिक स्थिति व कार्यक्षमता सुधारना। एजुकेशनल साइकोलॉजी – छात्रों की सीखने की प्रक्रिया, रुचियों और व्यवहार को समझना। फॉरेंसिक साइकोलॉजी – अपराध की जांच में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रयोग। स्पोर्ट्स ...

“शिक्षक द्वारा पिटाई – बुराई या भलाई?”

विषय: “शिक्षक द्वारा पिटाई – बुराई या भलाई?” माननीय प्रधानाचार्य, आदरणीय शिक्षकों और मेरे प्रिय साथियों, आप सबको मेरा सादर प्रणाम। आज मैं एक ऐसे विषय पर बोलने जा रहा हूँ जो हम सबके व्यवसायिक जीवन से जुड़ा है – क्या शिक्षक द्वारा पिटाई बुराई है या भलाई? मित्रों! महाभारत हमें सिखाती है कि जब कोई अपने मार्ग से भटक जाए तो गुरु या मार्गदर्शक का कर्तव्य है कि वह उसे सही राह दिखाए। श्रीकृष्ण ने भी अपने ही बुआ के पुत्र शिशुपाल को दंड दिया, क्योंकि बार-बार चेतावनी के बाद भी वह अपनी गलती से नहीं माना। उसी तरह दुर्योधन को भी दंड मिला, क्योंकि उसने अन्याय और अहंकार का रास्ता चुना। अब मैं आपसे पूछना चाहता हूँ – अगर कोई छात्र बार-बार गलती करे, प्यार से समझाने पर भी न माने, तो क्या उसकी गलतियों को हमेशा अनदेखा किया जा सकता है? यहाँ पर उपस्थित सभी शिक्षक का उत्तर शायद नहीं ही होगा। प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था में दीक्षा का अर्थ था कठोर अनुशासन। वहाँ पिटाई का उद्देश्य केवल दर्द देना नहीं था, बल्कि अहंकार तोड़ना और एकाग्रता लाना था। गुरु का डंडा प्रेम और शिक्षा का प्रतीक था। लेकिन आज के वर्तमान पारिदृश्य म...

विशेष शिक्षा क्या है? | महत्व, उद्देश्य और सरकारी सुविधाएँ

 विशेष शिक्षा क्या है? | महत्व, उद्देश्य और सरकारी सुविधाएँ विशेष शिक्षा:-  विशेष शिक्षा (Special Education) का मतलब है ऐसे बच्चों को शिक्षा देना जिन्हें सामान्य बच्चों की तरह सीखने में कठिनाई होती है। ये बच्चे शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या सीखने से जुड़ी किसी समस्या से जूझते हैं। विशेष शिक्षा उनके लिए अलग शिक्षण पद्धति, प्रशिक्षित शिक्षक और सहायक साधनों की मदद से पढ़ाई सुनिश्चित करती है। विशेष शिक्षा की जरूरत क्यों पड़ी? समाज में लंबे समय तक दिव्यांग बच्चों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिल पाया। वे या तो घर तक सीमित रह जाते थे या सामान्य स्कूलों में सही माहौल न मिलने से पढ़ाई छोड़ देते थे। सामान्य शिक्षण पद्धति उनके लिए कठिन होती थी। समाज में जागरूकता की कमी थी। शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण नहीं मिलता था। इन्हीं कारणों से विशेष शिक्षा की शुरुआत हुई ताकि हर बच्चा शिक्षा से जुड़ सके और आत्मनिर्भर बन सके। विशेष शिक्षा में शामिल वर्ग विशेष शिक्षा खासकर दिव्यांग बच्चों (Children with Disabilities) के लिए है। इसमें शामिल हैं – दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले बच्चे। श्रवण बाधित (Deaf & Har...