Posts

तुमने, अश्रु तो छिपा लिए

Image
तुमने, अश्रु तो छिपा लिए  लेकिन, ज़ख्म कैसे छिपाओगे  मिश्री जैसी वाणी से  मरहम कैसे लगाओगे? कटाक्ष किया था तुमने जो   वो घाव बहुत ही गहरा है  विष जो फैला है, मन मे  उसकी औषधि, कहाँ से लाओगे?  डोर रिश्तों की कोमल है  रिश्ते मे पड़ी गांठ को  क्या, तुम खोल पाओगे? बिखरे मोती माला के  कहाँ से समेट कर लाओगे ? 

बोर्ड परीक्षा मे बैठने जा रहे छात्रों के लिए दिशा निर्देश

फरवरी माह से लगभग सभी राज्य की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने जा रही है। इस दौरान परीक्षा केंद्र मे जाने से पूर्व छात्रों, खास तौर पर वह छात्र जो कि पहली बार बोर्ड की परीक्षा मे बैठने जा रहे है और उनके अभिभावक के मन मे कई तरह के संदेह रहते है। उनके मन मे डर रहता है कि परीक्षा केंद्र मे जाने से पूर्व या प्रवेश करते समय कौन से डोक्यूमेंट ले जाने जरूरी है। छात्रों के मन मे बैठे डर और संदेह को दूर करने के लिए बोर्ड द्वारा कई तरह के दिशा निर्देश जारी किए गए है। आज हम इस लेख के माध्यम से बताएँगे कि छात्रों को परीक्षा केंद्र मे जाने से पूर्व किस तरह कि सावधानी बरतनी चाहिए और प्रवेश करते समय कौन कौन से डोक्यूमेंट अपने साथ ले जाने आवश्यक है।  बोर्ड द्वारा निर्धारित ड्रेस कोड  :- रेगुलर स्टूडेंट्स के लिए - स्कूल यूनिफ़ोर्म  प्राइवेट स्टूडेंट्स के लिए - लाइट कलर के हल्के कपड़े   बोर्ड परीक्षा में जाने से पूर्व, परीक्षा केंद्र मे प्रवेश करते समय छात्रों को निम्न चीजों को लाने की होगी अनुमति :-  प्रवेश पत्र और स्कूल पहचान पत्र (रेग्यूलर छात्रों के लिए) एडमिट कार्ड और वैलिड आईड...

ये दर्द है की सब कुछ भूला देता है

Image
1 ये  दर्द  है  की  सब  कुछ  भूला  देता  है  जख्मों  को  भी  सीना  सीखा  देता  है जो  सीख  ले  जीना  इन  पलों  को  जिंदगी की राह मे वो तबस्सुम  खिला देता है   2  तेरे संग मुझे सहारा मिल जाता है  जैसे सफीने को किनारा मिल जाता है तुझसे मिलते ही बंज़र जिंदगी  मे  मेरी  मानो जैसे  गुलिस्तां  खिल  जाता  है      

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात शिक्षा नीति

Image
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात शिक्षा के गिरते हुए स्तर में सुधार लाने के लिए सत्ताधीश सरकार द्वारा समय समय पर कई प्रयास किये गए । शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए कई सारी नीतियां लागू की गई । इन नीतियों को लागू करने का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना था। लेकिन आधुनिकता, वैश्वीकरण,पाश्चात्य सभ्यता के इस युग में भारतीय शिक्षा पद्धति,तथा संस्कृति का पतन होता गया । जिसका बुरा असर हमारे आज के समाज पर साफ तौर पर देखा जा सकता है। अपनी मातृभाषा को त्याग कर विदेशी भाषा को भी भारतीय संविधान में जोड़ दिया गया। मैकाले द्वारा बनाई गई वर्तमान शिक्षा प्रणाली ने भारतीय समाज की एकता को नष्ट करने तथा वर्णाश्रित कर्म के प्रति घृणा उत्पन्न करने का एक काम किया। मैकाले की शिक्षा पद्धति का मुख्य उद्देश्य भारत देश मे – संस्कृत, फारसी तथा लोक भाषाओं के वर्चस्व को तोड़कर अंग्रेजी का वर्चस्व कायम करना तथा इसके साथ ही सरकार चलाने के लिए देश के युवा अंग्रेजों को तैयार करना था । मैकाले की इस शिक्षा प्रणाली के जरिए वंशानुगत कर्म के प्रति घृणा पैदा करने और परस्पर विद्वेष फैलाने की भी कोशिश की ग...

अंधेरे की ओट मे ये जो दिया जलता है

Image
अंधेरे  की  ओट  मे,  ये  जो  दीया जलता  है दुनिया को रोशन करने की चाह मे खुद को वो छलता है नजाने  किस  भ्रम  मे  वो  रखता  है  खुद  को  जल  कर  खुद  कतरा  कतरा  पिघलता  है   

इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता

Image
 घर पर आये मुसाफिर को खाली हाथ नहीं भेजा जाता सौदों  मे  हर  बार  स्वार्थ  नहीं  देखा  जाता ज़िंदगी की राह पर मुसाफिर मिल ही जाते है इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता. https://draft.blogger.com/blog/post/edit/3204513329264443755/4287435210650540058

बच्चे का व्यवहार, माता-पिता के व्यवहार का प्रतिबिंब

Image
15 वर्षों के शिक्षण के दौरान, अक्सर मैंने यह अनुभव किया है कि, आजकल के अधिकतर अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों से शिकायत रहती है कि, उनका बच्चा उनकी बातें नहीं सुनता या फिर उन्हें इगनोर कर देता है। अपने से बड़ों के साथ उनका व्यवहार तथा बातचीत का तरीका सही नहीं है, वह दिनभर फोन चलाता रहता है या फिर खाना खाने मे आनाकानी करता है, आदि। इसके अतिरिक्त भी कई तरह के सोच रखने वाले  अभिभावकों से समय समय पर मिलना-जुलना  लगा रहता है और सभी कि राय या फिर शिकायत कहे आदि सुनने को मिलती रहती है। उनके पास बच्चों के व्यवहार से संबन्धित समस्याएँ तो अनगिनत रहती है लेकिन समाधान के नाम पर उनके पास होता है,एक तरह का डोमिनेटिंग बिहेवियर, उनका मानना है कि बच्चों को डांट या शारीरिक दंड इत्यादि से सुधारा जा सकता है। इसके अलावा समाधान के नाम पर अभिभावक अपने बच्चे कि तुलना उसके हम उम्र बच्चों से करने लगते है। वो ऐसा इसलिए करते है, क्योंकि शायद उन्हें लगता है कि इस तरह एक दूसरे से तुलना करके या फिर शारीरिक दंड आदि से  उनका बच्चा सुधार जाएगा या फिर मोटीवेट  होगा। लेकिन आज वर्तमान समय मे देखा गया है कि ...