घर पर आये मुसाफिर को खाली हाथ नहीं भेजा जाता
सौदों मे हर बार स्वार्थ नहीं देखा जाता
ज़िंदगी की राह पर मुसाफिर मिल ही जाते है
इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता.
![]() |
घर पर आये मुसाफिर को खाली हाथ नहीं भेजा जाता
सौदों मे हर बार स्वार्थ नहीं देखा जाता
ज़िंदगी की राह पर मुसाफिर मिल ही जाते है
इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता.
![]() |
"एक समाज, अनेक बँटवारे" साधारण से दिखने वाले समाज को चंद लोगों ने बांट दिया,अलग धड़ों मे सर्वप्रथम बंटवारा था स्त्री और पुरुष ...
No comments:
Post a Comment