घर पर आये मुसाफिर को खाली हाथ नहीं भेजा जाता
सौदों मे हर बार स्वार्थ नहीं देखा जाता
ज़िंदगी की राह पर मुसाफिर मिल ही जाते है
इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता.
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घर पर आये मुसाफिर को खाली हाथ नहीं भेजा जाता
सौदों मे हर बार स्वार्थ नहीं देखा जाता
ज़िंदगी की राह पर मुसाफिर मिल ही जाते है
इंसानियत को परखने के लिए बदन का लिबास नहीं देखा जाता.
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कहानी :- चींटी की समझदारी की यात्रा चींटी अपने परिवार के साथ रहती थी। उसके दो बच्चे थे, जो रोज़ स्कूल जाते थे। एक दिन बच्चों ने मासूमियत से ...
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