Tuesday, January 28, 2025

अंधेरे की ओट मे ये जो दिया जलता है

अंधेरे  की  ओट  मे,  ये  जो  दीया जलता  है

दुनिया को रोशन करने की चाह मे खुद को वो छलता है

नजाने  किस  भ्रम  मे  वो  रखता  है  खुद  को 

जल  कर  खुद  कतरा  कतरा  पिघलता  है


  

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