Wednesday, June 18, 2025

ज़िंदगी मे एक दोस्त तो, ऐसा भी होना चाहिए

ज़िंदगी मे एक दोस्त तो, ऐसा भी होना चाहिए

जिसके पास हर दर्द के लिए एक मरहम होना चाहिए

कर सको अपने मन की बात जिससे  तुम

काँधे मे सिर रख, उसके रो सको तुम

दूर हो, फिर भी दूरी का एहसास न हो

मौन हो अधर, लेकिन प्यासे जज़्बात न हो

अंदर की व्यथा को वो जान ले 

हंसी के पीछे छिपे आँसुओ को पहचान ले,

रूह की माफिक साथ खड़ा नज़र वो आए 

वक़्त की आंधियों में वो साथ निभाए,

भूपेंद्र रावत 

No comments:

Post a Comment

"एक समाज, अनेक बँटवारे"

  "एक समाज, अनेक बँटवारे" साधारण से दिखने वाले  समाज को चंद लोगों ने बांट दिया,अलग धड़ों मे सर्वप्रथम बंटवारा था  स्त्री और पुरुष ...