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CBSE NISHTHA Courses 2026-27: 5 New Courses for Teachers | Enrollment Last Date 31 August 2026

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 CBSE NISHTHA Courses 2026-27: 5 New Courses for Teachers | Enrollment Last Date 31 August 2026 CBSE has released Circular No. TRG-15/2026 dated 13 August 2026 regarding enrollment in NISHTHA Courses for the 2026-27 Cycle 1. Teachers and School Heads can enroll in courses such as NISHTHA FLN, ECCE, Cyber Hygiene, E-Waste, Action Research and Catch the Rain. 📅 Enrollment closes: 31 August 2026 📚 Course cycle: April–October 2026 🎓 For: Teachers & School Heads 📜 Certificate/Professional Development opportunity 👉 Want to know the complete course list, eligibility, important dates and official enrollment link? Read the full CBSE Circular on https://www.cbse.gov.in/cbsenew/documents/15_Circular_2026_13082026.pdf

“डायल करें और जानें — आपका फोन सुरक्षित है या नहीं?”

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“डायल करें और जानें — आपका फोन सुरक्षित है या नहीं?” आज मोबाइल फोन का हैंग होना एक सामान्य तकनीकी समस्या लगती है, लेकिन कई बार यही समस्या साइबर ठगी, डेटा चोरी और फोन पर अनधिकृत नियंत्रण का संकेत भी हो सकती है। कई मामलों में फोन हमारे हाथ में होता है, लेकिन उसे नियंत्रित कोई और (अजनबी) कर रहा होता है—जो शारीरिक रूप से हमारे सामने नहीं होता, पर हमारे बैंक, सोशल मीडिया और निजी जानकारी तक पहुँच बना चुका होता है। ऐसी स्थिति में यह जानना आवश्यक हो जाता है कि हम किसी साइबर स्कैम का शिकार तो नहीं हो रहे हैं।  फोन से ही कैसे पहचानें संभावित साइबर ठगी? बहुत कम लोग जानते हैं कि मोबाइल फोन में मौजूद USSD कोड से हम यह जाँच सकते हैं कि कहीं हमारी कॉल, मैसेज या डेटा किसी और नंबर पर डायवर्ट तो नहीं हो रहा। 📲 महत्वपूर्ण सुरक्षा जाँच कोड 🔹 *#21# ➡ यह कोड बताता है कि आपकी कॉल SMS डेटा किसी अन्य नंबर पर फॉरवर्ड तो नहीं हो रहे। यदि यहाँ कोई अज्ञात नंबर दिखाई दे, तो यह साइबर ठगी का संकेत हो सकता है। 🔹 ##002# ➡ फोन में चालू सभी प्रकार की कॉल-फॉरवर्डिंग तुरंत बंद कर देता है। ✔️ यह सबसे सुरक्षित और उपयो...

शिक्षक के जीवन का चक्र

 शिक्षक के जीवन का चक्र शिक्षक का जीवन एक ऐसे मार्ग की तरह होता है जो स्वयं अपनी जगह स्थिर रहता है, लेकिन अपने छात्रों को उनके गंतव्य तक पहुँचा देता है। उसका जीवन चक्र लगभग जीवन भर एक-सा चलता रहता है—निरंतर, शांत और समर्पित। हर दिन वह भी एक छात्र की तरह अपना झोला उठाकर विद्यालय जाता है। वहाँ बच्चों को पढ़ाता है, उन्हें दिशा देता है और दिन के अंत में उनसे कुछ न कुछ सीखकर ही लौटता है। क्योंकि शिक्षण केवल सिखाने का नहीं, बल्कि सीखते रहने का भी व्यवसाय है। जो शिक्षक सीखना छोड़ देता है, वह अपने पेशे में अधिक समय तक टिक नहीं सकता। शिक्षक और छात्र का संबंध रेलवे की दो पटरियों जैसा है—दोनों साथ-साथ चलते हैं। यदि एक भी पटरी कमजोर हो जाए, तो पूरी गाड़ी पटरी से उतर सकती है। इसी तरह शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक, छात्र, अभिभावक और समाज—सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं। जब कोई छात्र असफल होता है, तो उस असफलता की जिम्मेदारी अक्सर एक-दूसरे पर डाल दी जाती है। कई बार अभिभावक अपने बच्चे की असफलता के लिए दूसरों को दोषी ठहराते हैं, जबकि उन्हें पूरे छात्र समुदाय की चिंता नहीं होती—सिर्फ अ...

अरावली पर्वत श्रृंखला : इतिहास, जीवन, पर्यावरण और वर्तमान चुनौतियाँ

 अरावली पर्वत श्रृंखला : इतिहास, जीवन, पर्यावरण और वर्तमान चुनौतियाँ अरावली पर्वत श्रृंखला का इतिहास अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत प्रणालियों में से एक मानी जाती है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार इसकी उत्पत्ति लगभग 250 से 300 करोड़ वर्ष पहले हुई थी, जब पृथ्वी की सतह अभी अपने प्रारंभिक विकास के चरण में थी। यह पर्वतमाला गुजरात से शुरू होकर राजस्थान और हरियाणा होते हुए दिल्ली तक फैली हुई है। प्राचीन काल में अरावली पर्वत न केवल एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करता था, बल्कि उत्तर भारत की जलवायु, वर्षा व्यवस्था और नदियों के प्रवाह को भी नियंत्रित करता था। इतिहास में यह क्षेत्र अनेक सभ्यताओं, जनजातियों और राजवंशों का आश्रय रहा है। अरावली के आसपास बसे क्षेत्र प्राचीन व्यापार मार्गों, सांस्कृतिक संपर्कों और युद्धों के साक्षी रहे हैं। अरावली पर लोगों की निर्भरता अरावली पर्वत श्रृंखला पर और इसके आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़ा हुआ है। ग्रामीण समुदायों की आजीविका खेती, पशुपालन, वनोपज संग्रह और पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर रही है। अरावल...

NCERT - Class - 6 Chapter – 3 Landforms and Life Useful for TET, CTET, State TETs, DSSSB, KVS, NVS & other Govt Exams - Group - C & D हरियाणा CET | Group C & D

NCERT - Class - 6 Chapter – 3   Landforms and Life  Useful for TET, CTET, State TETs, DSSSB, KVS, NVS & other Govt Exams - Group - C & D हरियाणा CET | Group C & D Q1. पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले प्राकृतिक आकार क्या कहलाते हैं? A. स्थलरूप B. पर्यावरण C. मौसम D. पारिस्थितिकी ✅ उत्तर: A Q2. स्थलरूपों का निर्माण मुख्य रूप से होता है— A. कुछ वर्षों में B. हजारों वर्षों में C. लाखों वर्षों में D. करोड़ों वर्षों में ✅ उत्तर: D Q3. स्थलरूपों की तीन प्रमुख श्रेणियाँ हैं— A. पर्वत, मरुस्थल, वन B. पर्वत, पठार, मैदान C. मैदान, नदी, झील D. द्वीप, समुद्र, पर्वत ✅ उत्तर: B Q4. पर्वतों की पहचान किससे होती है? A. चौड़ा शीर्ष B. समतल ढाल C. तीव्र ढाल और संकीर्ण शिखर D. रेतीली मिट्टी ✅ उत्तर: C Q5. अधिक ऊँचाई वाले पर्वतों पर सामान्यतः क्या पाया जाता है? A. वर्षा B. वन C. स्थायी बर्फ D. घास ✅ उत्तर: C Q6. पर्वतों से निकलने वाली नदियाँ जल प्रदान करती हैं— A. मैदानों को B. पठारों को C. मरुस्थलों को D. महासागरों को ✅ उत्तर: A Q7. पर्वतों में रहने वाले लोग मुख्यतः कौन-सी फसल उगाते...

हरियाणा Group C & D भौतिक विज्ञान महत्वपूर्ण Objective (MCQ) प्रश्न , सरकारी Group C एवं D परीक्षाओं के लिए पूरी तरह परीक्षा-उपयोगी हैं। (HSSC / CET आधारित)

 हरियाणा Group C & D भौतिक विज्ञान  महत्वपूर्ण Objective (MCQ) प्रश्न ,   सरकारी Group C एवं D परीक्षाओं के लिए पूरी तरह परीक्षा-उपयोगी हैं। (HSSC / CET आधारित) Q1. आवेग का सूत्र है— A. बल × दूरी B. बल × समय C. द्रव्यमान × वेग D. ऊर्जा × समय ✅ उत्तर: B Q2. आवेग किसके बराबर होता है? A. वेग में परिवर्तन B. संवेग में परिवर्तन C. ऊर्जा में परिवर्तन D. बल में परिवर्तन ✅ उत्तर: B Q3. आवेग की SI इकाई है— A. न्यूटन B. जूल C. न्यूटन-सेकंड D. वाट ✅ उत्तर: C Q4. अधिक समय तक बल लगाने से आवेग— A. घटता है B. शून्य हो जाता है C. बढ़ता है D. अपरिवर्तित रहता है ✅ उत्तर: C Q5. क्रिकेट में गेंद को कैच करते समय हाथ पीछे ले जाया जाता है ताकि— A. बल बढ़े B. समय बढ़े C. संवेग बढ़े D. ऊर्जा बढ़े ✅ उत्तर: B Q6. वृत्तीय गति में आवश्यक बल कहलाता है— A. अपकेन्द्रीय B. गुरुत्वीय C. अभिकेन्द्रीय D. घर्षण ✅ उत्तर: C Q7. अभिकेन्द्रीय बल की दिशा होती है— A. बाहर की ओर B. केन्द्र की ओर C. स्पर्शरेखा के अनुदिश D. ऊपर की ओर ✅ उत्तर: B Q8. अभिकेन्द्रीय बल का सूत्र है— A. mv/r B. mv²r C. mv²/r D. mr/...

रेड पेन से ग्रीन पेन तक: मूल्यांकन की बदलती सोच पर एक विमर्श

रेड पेन से ग्रीन पेन तक: मूल्यांकन की बदलती सोच पर एक विमर्श भूमिका: एक परिचित दृश्य और एक अनकहा प्रभाव भारतीय शिक्षा व्यवस्था में वर्षों तक एक दृश्य बेहद सामान्य रहा है—छात्र की उत्तरपुस्तिका, उस पर लाल स्याही के मोटे निशान, जगह-जगह कटे हुए उत्तर और हाशिये पर लिखी गई टिप्पणियाँ। यह केवल कॉपी जाँचने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि शिक्षा की एक गहरी जमी हुई मानसिकता थी। रेड पेन यहाँ सिर्फ एक रंग नहीं था, बल्कि सत्ता, अनुशासन और निर्णय का प्रतीक था। आज जब सीबीएसई रेड पेन के प्रयोग से दूरी बनाने की बात करता है, तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल उठते हैं- क्या केवल पेन का रंग बदल देने से कुछ बदल जाएगा? जब मूल्यांकन की प्रक्रिया वही है, तो रेड पेन पर आपत्ति क्यों? इन सवालों के उत्तर रंग में नहीं, बल्कि सोच के बदलाव में छिपे हैं। पहले की शिक्षा व्यवस्था: डर आधारित अनुशासन कुछ दशक पहले तक शिक्षा व्यवस्था का मूल ढाँचा बिल्कुल स्पष्ट था। शिक्षक को “अंतिम सत्य” माना जाता था और छात्र का काम था उस सत्य को बिना प्रश्न स्वीकार करना। गलती करना कमजोरी समझी जाती थी और मूल्यांकन का उद्देश्य सीख को सुधारना नहीं, ब...

अरावली : एक विकसित भूल

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 अरावली : एक विकसित भूल जैसे धीरे-धीरे लुप्त हो गईं कई ऐतिहासिक धरोहरें, उसी तरह एक दिन खो जाएगी अरावली भी। पर्यावरण के विद्वानों ने प्रत्यक्ष प्रमाणों के साथ सिद्ध कर दिया— वर्षों से स्थिर खड़ी प्राणदायिनी अरावली अब विकसित भारत के लिए औषधि नहीं, बल्कि समस्या है। कौन कहता है ईश्वर गलती नहीं करते? शायद अरावली के निर्माण के समय ईश्वर से भी कुछ भूल हो गई— सीमाएँ तय करने में अरावली की। विकसित भारत की परिभाषा देने वाले चंद विद्वानों ने तथ्यों के साथ यह सिद्ध कर दिया कि ईश्वर भी गलती करते हैं। काली बाज़ारी, खनन की चोरी, पेड़ों की अंधी कटाई, निर्दोष जीवों को बेघर करना— यही हैं आज विकास के प्रमाण। और अरावली— बस एक बाधा, जिसे मिटा देना है तरक़्क़ी की राह से भूपेंद्र रावत