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CBSE NISHTHA Courses 2026-27: 5 New Courses for Teachers | Enrollment Last Date 31 August 2026

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 CBSE NISHTHA Courses 2026-27: 5 New Courses for Teachers | Enrollment Last Date 31 August 2026 CBSE has released Circular No. TRG-15/2026 dated 13 August 2026 regarding enrollment in NISHTHA Courses for the 2026-27 Cycle 1. Teachers and School Heads can enroll in courses such as NISHTHA FLN, ECCE, Cyber Hygiene, E-Waste, Action Research and Catch the Rain. 📅 Enrollment closes: 31 August 2026 📚 Course cycle: April–October 2026 🎓 For: Teachers & School Heads 📜 Certificate/Professional Development opportunity 👉 Want to know the complete course list, eligibility, important dates and official enrollment link? Read the full CBSE Circular on https://www.cbse.gov.in/cbsenew/documents/15_Circular_2026_13082026.pdf

कहानी:- दाग़ और गलती

 दाग़ और गलती हमारी ज़िंदगी भी उन कपड़ों की तरह है जिनमें यदि एक छोटा-सा दाग़ लग जाए तो पूरा कपड़ा बेकार सा लगने लगता है। ठीक इसी तरह जीवन में की गई छोटी-सी गलती भी कभी-कभी हमारे पूरे जीवन पर भारी पड़ जाती है। एक दिन कक्षा में मैडम बच्चों को समझा रही थीं— "बच्चों! हमें जीवन के हर कदम पर सोच-समझकर चलना चाहिए। बचपन में शरारतें करना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी अनजाने में की गई शरारतें हमें उम्रभर का पछतावा दे सकती हैं।" लेकिन बच्चे तो बच्चे थे। उनकी नटखट बातें और खेलकूद में डूबा मन इन बातों को हल्के में ले रहा था। कुछ ही दिनों बाद स्कूल में एक विशेष कार्यक्रम रखा गया। सभी बच्चे उत्साह से भरे हुए थे और सुंदर-सुंदर नए कपड़े पहनकर आए थे। कार्यक्रम शुरू हुआ, सब बहुत आनंद ले रहे थे। तभी कुछ बच्चों के कपड़ों पर दाग़ लग गए। उनकी पोशाक बिगड़ गई और वह बहुत भद्दी लगने लगी। अब उनके पास न तो बदलने के लिए दूसरा कपड़ा था और न ही नया लाने का समय। मजबूर होकर वे बच्चे बीच कार्यक्रम से ही घर लौट गए। उनके दोस्तों ने मज़े किए, लेकिन वे उदासी और अफसोस में रह गए। अगले दिन जब सभी बच्चे स्कूल पहुँचे तो...

अभिभावक की भूमिका और पी.टी.एम. का महत्व

 अभिभावक की भूमिका और पी.टी.एम. का महत्व स्कूल नियमित रूप से चल रहे थे। इसी दौरान बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन करने के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा का उद्देश्य केवल अंक देना नहीं था, बल्कि बच्चों की कमियों को पहचानना और उनके अभिभावकों तक उन कमियों को पहुँचाना भी था। कुछ दिनों बाद जब पी.टी.एम. (Parent Teacher Meeting) का दिन आया तो सभी बच्चों के मन में हल्का-सा डर था कि आज उनके शिक्षक उनके अभिभावकों से शिकायत करेंगे। धीरे-धीरे अभिभावक अपने बच्चों के परिणाम देखने आए। कई अभिभावक अच्छे परिणाम देखकर प्रसन्न हुए और शिक्षकों का धन्यवाद भी दिया। लेकिन कुछ अभिभावक ऐसे भी थे, जिन्हें अपने बच्चों के कम अंक देखकर आश्चर्य हुआ। वे कहते— "हम तो बच्चे को रोज ट्यूशन भेजते हैं, घर का कोई काम नहीं करवाते, हर सुविधा उपलब्ध कराते हैं, फिर भी अंक इतने कम क्यों आए?" शिक्षक उनकी बातें सुनकर हैरान थे, क्योंकि यही वे अभिभावक थे जिन्होंने कभी अपने बच्चे का स्कूल बैग तक नहीं देखा था। बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी। ये वे अभिभावक थे जो सिर्फ परिणाम आने पर जागते ह...

धागे : सभ्यता की डोर

  धागे : सभ्यता की डोर ​धागा (Thread या Yarn) एक ऐसी सरल वस्तु है जो हमारे जीवन और सभ्यता के ताने-बाने में गहराई से समाई हुई है। यह केवल कपड़ा बुनने का एक माध्यम नहीं है; यह इतिहास, संस्कृति, प्रौद्योगिकी और मानव कलात्मकता का प्रतीक है। धागे की कहानी लाखों साल पुरानी है, जब आदिम मनुष्य ने पहली बार जानवरों के फर या पौधों के रेशों को आपस में मोड़कर एक मजबूत, निरंतर लच्छेदार संरचना बनाना सीखा था। इस आविष्कार ने मानव सभ्यता को एक नई दिशा दी, जहाँ केवल पत्ते और खाल पहनने की मजबूरी समाप्त हुई और बुनाई (weaving), सिलाई (sewing), और कढ़ाई (embroidery) जैसे जटिल शिल्प का जन्म हुआ। ​धागे का इतिहास और विकास ​धागे का इतिहास मानव विकास के इतिहास से जुड़ा हुआ है। शुरुआती धागे प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किए जाते थे, जैसे: ​पशु-आधारित धागे: ​ऊन (Wool): भेड़, बकरी या लामा जैसे जानवरों के बालों से प्राप्त, जो सर्दी से बचाव के लिए आदर्श था। ​रेशम (Silk): रेशम के कीड़ों के कोकून से प्राप्त, जो अपनी चमक और कोमलता के लिए हजारों वर्षों से मूल्यवान रहा है। ​पौधे-आधारित धागे: ​कपास (Cotton): कपास के पौधे...

कहानी – जिम्मेदारी का महत्व

 कहानी – जिम्मेदारी का महत्व एक छोटा बच्चा था। वह बहुत होशियार और समझदार था। किसी को उससे कोई शिकायत नहीं थी। लंबे समय बाद उसके दादाजी गाँव से उनके घर आए। दादाजी को देखकर बच्चा बहुत खुश हुआ, क्योंकि अब उसके पास खेलने और बातें करने वाला साथी मिल गया था। अब उसके दिन बोरिंग नहीं, बल्कि खुशी और उत्साह से बीतने लगे। लेकिन दादाजी ने कुछ ही दिनों में घर का माहौल ध्यान से देखा। उन्हें महसूस हुआ कि बच्चे की बातें उसके माता-पिता अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मम्मी-पापा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपने कर्तव्य से बचते रहते थे। यह देखकर दादाजी चुप रहे, पर मन में उन्होंने परिवार को एक सीख देने का निश्चय किया। एक दिन खाने की मेज़ पर सब बैठे थे। दादाजी ने पोते से कहा— “बेटा, कल कुछ गमले और पौधे ले आना। घर पर मेरा समय अच्छे से कट जाएगा और हमें भी एक अच्छा काम करने को मिलेगा।” अगले दिन पौधे आ गए। दादाजी ने प्रतियोगिता का सुझाव दिया। एक गमले की जिम्मेदारी दादाजी और पोते ने मिलकर ली, जबकि दूसरे गमले की जिम्मेदारी मम्मी-पापा को दी गई। दादाजी और पोता रोज़ पौधे को पानी देते, उसकी देखभाल करते। धीरे-धीरे...

मैं लिखूँगा तुम्हें

 मैं लिखूँगा तुम्हें मैं गढ़ूँगा क़सीदे तुम्हारे — तुम्हारे इतराने पर, तुम्हारे रूठ कर चले जाने पर, तुम्हारी मुस्कान में छुपी उजली धूप पर, और तुम्हारे खुशी से गले लग जाने पर। मैं लिखूँगा तुम्हें — उस चाँदनी रात में, जब तुम्हारी घनी ज़ुल्फ़ों में एक मुसाफ़िर की सरसराहट धीरे-धीरे खो जाती है। मैं लिखूँगा तुम्हारे जज़्बातों पर, हम दोनों के हालातों पर, उन लम्हों पर भी जो अनकहे रह जाते हैं। मैं लिखूँगा हर सूक्ष्म बात, हर नन्ही-सी अनुभूति — जब तक कि स्वयं का अस्तित्व नगण्य न हो जाए।

जब आपसे बड़ा आपका अहं हो जाता है पूरी दुनिया सूक्ष्म और मैं शेष रह जाता है रिश्तों की अहमियत न समझने वाले रिश्ते उनका खोखली इमारत बन ढह जाता हैं

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 तुम्हारे बाद ये अफसाना याद रहेगा तुम्हारे संग गुज़ारा हर ज़माना याद रहेगा लम्हें जो गुज़रेंगे, तुम्हारे जाने के बाद उनमे  तो बस मयखाना याद रहेगा जब आपसे बड़ा आपका अहं हो जाता है पूरी दुनिया सूक्ष्म और मैं शेष रह जाता है रिश्तों की अहमियत न समझने वाले रिश्ता उनका खोखली इमारत बन ढह जाता हैं

Class 10 Economics, Chapter – 2 “Sectors of the Indian Economy”

 Class 10 Economics, Chapter – 2 “Sectors of the Indian Economy” Set – 1 1 Mark (MCQ): Which sector includes agriculture and related activities? a) Primary b) Secondary c) Tertiary d) Organized The sector that transforms raw materials into finished goods is: a) Primary b) Secondary c) Tertiary d) None Call centres are an example of: a) Primary sector b) Secondary sector c) Tertiary sector d) Private sector MNREGA (2005) guarantees ___ days of employment in a year. a) 50 b) 100 c) 120 d) 150 Which of the following is not in the organized sector? a) Government schools b) Hospitals c) Self-employed farmers d) Banks Which sector contributes the most to India’s GDP? a) Primary b) Secondary c) Tertiary d) Private Under Right to Work Which Policy made by Govt. Of India. 3 Marks Questions: Explain the importance of the tertiary sector in modern times. Differentiate between public and private sectors with examples. Why do we need employment guarantee schemes like MNREGA? Define disguised un...