Friday, February 14, 2025

हार तब नहीं होती, जब हार जाते है

हार तब नहीं होती, 

जब हार जाते है 

बल्कि हार तब होती है, 

जब हार मान जाते है। 

निराश हो कर 

हार मान जाना 

सफलता के रास्ते 

बंद कर देता है

सपने और लक्ष्यों को 

मंझधार मे छोड़ देता है

हार मानने से पहले 

पुनः प्रयास करो

आशावादी बनो और 

अभ्यास करो    




भूपेंद्र रावत 

 


2 comments:

"एक समाज, अनेक बँटवारे"

  "एक समाज, अनेक बँटवारे" साधारण से दिखने वाले  समाज को चंद लोगों ने बांट दिया,अलग धड़ों मे सर्वप्रथम बंटवारा था  स्त्री और पुरुष ...