Brain Mapping क्या है? आपराधिक मामलों में इसकी विश्वसनीयता और कानूनी नियम

 Brain Mapping क्या है? आपराधिक मामलों में इसकी विश्वसनीयता और कानूनी नियम

अपराध की जांच में जब पारंपरिक तरीके जैसे पूछताछ, गवाह या भौतिक सबूत पर्याप्त नहीं होते, तब फॉरेंसिक साइंस (Forensic Science) की आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है। इन्हीं में से एक चर्चित तकनीक है ब्रेन मैपिंग (Brain Mapping)। हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों के कारण यह चर्चा में रही है।

इस लेख में हम जानेंगे—ब्रेन मैपिंग क्या है, यह कैसे काम करती है, इसका इतिहास, कानूनी स्थिति और नारको टेस्ट से इसका अंतर।

1. ब्रेन मैपिंग क्या है? (मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण)

मनोविज्ञान और तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) के अनुसार, ब्रेन मैपिंग वास्तव में कई तकनीकों का समूह है, जैसे:

qEEG (Quantitative Electroencephalogram)

Neuroimaging techniques

सरल शब्दों में, यह मस्तिष्क की गतिविधियों का एक विज़ुअल मैप (Visual Map) तैयार करने की प्रक्रिया है।

यह कैसे काम करती है?

हमारा मस्तिष्क हर अनुभव को मेमोरी (Memory) के रूप में संग्रहित करता है।

जब व्यक्ति के सामने किसी घटना से जुड़ी वस्तु या दृश्य आता है, तो मस्तिष्क अनजाने में एक विशेष विद्युत तरंग उत्पन्न करता है।

इसे P300 वेव (P300 Wave) कहा जाता है।

ब्रेन मैपिंग इसी मस्तिष्कीय प्रतिक्रिया को रिकॉर्ड करके यह समझने की कोशिश करती है कि व्यक्ति के दिमाग में किसी घटना से जुड़ी जानकारी मौजूद है या नहीं।

2. ब्रेन मैपिंग का उपयोग कब किया जाता है?

  • इस तकनीक का उपयोग मुख्यतः निम्न परिस्थितियों में किया जाता है:
  • जब पारंपरिक जांच तरीके असफल हो जाएं
  • संदिग्ध से छिपी हुई जानकारी निकालने के लिए
  • अपराध से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने हेतु
  • मानसिक रोगों के मूल्यांकन में (जैसे ADHD, डिप्रेशन, मिर्गी, अल्जाइमर)

3. कानूनी स्थिति (भारत में)

  • भारत में ब्रेन मैपिंग का उपयोग सीधे तौर पर बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता।
  • सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (Selvi vs State of Karnataka, 2010)
  • किसी भी व्यक्ति पर जबरदस्ती ब्रेन मैपिंग या नारको टेस्ट नहीं किया जा सकता
  • यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(3) (Self-incrimination से सुरक्षा) का उल्लंघन होगा

शर्तें:

  • आरोपी की लिखित सहमति जरूरी
  • न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक
  • प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक होनी चाहिए

4. ब्रेन मैपिंग का इतिहास

वैश्विक विकास

  • 1995: अमेरिकी न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. लॉरेंस फारवेल ने ब्रेन फिंगरप्रिंटिंग तकनीक विकसित की
  • इसका पहला उपयोग एक हत्या के मामले (JB Grinder Case) में किया गया था

भारत में विकास

  • भारत में इसे विकसित और उन्नत रूप में BEOS (Brain Electrical Oscillation Signature Profiling) के नाम से जाना जाता है
  • इसे NIMHANS, बेंगलुरु के वैज्ञानिक डॉ. सी.आर. मुकुंदन द्वारा विकसित किया गया

5. भारत में उपयोग किए गए प्रमुख मामले

  • ब्रेन मैपिंग या BEOS तकनीक का उपयोग कुछ चर्चित मामलों में किया गया है, जैसे:
  • आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज मामला (2024)
  • श्रद्धा वाकर हत्याकांड
  • आरुषि-हेमराज मर्डर केस

इन मामलों में इसका उपयोग संदिग्धों के बयानों और मानसिक प्रतिक्रियाओं की जांच के लिए किया गया।

6. ब्रेन मैपिंग बनाम नारको टेस्ट (मुख्य अंतर)

आधार ब्रेन मैपिंग (BEOS) नारको टेस्ट

प्रक्रिया इलेक्ट्रोड कैप से मस्तिष्क तरंगों की रिकॉर्डिंग दवा (Sodium Pentothal) देकर अर्ध-बेहोशी में पूछताछ

प्रकृति Non-invasive (बिना शरीर में दवा डाले) Invasive (दवा का उपयोग)


भूमिका व्यक्ति शांत बैठता है, केवल उत्तेजना दिखाई जाती है व्यक्ति से सवाल- जवाब किए जाते हैं

जोखिम लगभग सुरक्षित दवा के कारण जोखिम संभव

आधार P300 ब्रेन वेव्स अर्ध-बेहोशी में कम कल्पनाशक्ति

नियंत्रण मस्तिष्क की अनैच्छिक प्रतिक्रिया दवा से प्रभावित अवस्था

7. क्या यह तकनीक पूरी तरह विश्वसनीय है?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

  • ब्रेन मैपिंग को पॉलीग्राफ टेस्ट से अधिक उन्नत माना जाता है
  • यह सीधे मस्तिष्क की गतिविधियों पर आधारित है

कानूनी दृष्टिकोण:

  • इसे अंतिम सबूत (Direct Evidence) के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता
  • लेकिन इससे मिले सुरागों के आधार पर मिले भौतिक सबूत कोर्ट में मान्य होते हैं


निष्कर्ष

ब्रेन मैपिंग आधुनिक फॉरेंसिक साइंस और न्यूरोसाइंस का एक उन्नत तकनीकी उपकरण है, जो अपराध जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हालांकि यह जांच एजेंसियों के लिए उपयोगी है, लेकिन मानवाधिकार और कानूनी सीमाओं के कारण इसका उपयोग बहुत सावधानी और अनुमति के साथ ही किया जाता है।

इस तरह विज्ञान और कानून मिलकर न्याय व्यवस्था को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

Comments

  1. SHUBHAM KUMAR PRAJAPATIJune 10, 2026 at 4:47 AM

    Good information sir 👍

    ReplyDelete

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