इस धरा मे, सफर कितना शेष है, कोई नहीं बतायेगा

 इस धरा मे, सफर कितना शेष है, 

कोई नहीं बतायेगा


अमर रहा है क्या, कोई? 

जो तू रह जायेगा

एक दिन ये पार्थिव शरीर

इस मिट्टी के 

रंग मे मिल जायेगा

एक दिन राख बन 

चंद मुट्ठी मे समा जायेगा

फिर किस से 

अपना दर्द कहेगा

जब प्रवाह जल मे 

किया जायेगा

तेरा कर्म भी 

तेरे साथ चलेगा

अगर तू याद भी आयेगा, 

तो चंद कर्मो से जाना जायेगा

तेरा कर्म ही, 

तेरी पहचान बताएगा

कौन रखेगा तुझे याद,

 ये तो वक़्त ही बताएगा

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