OSM क्या है?
OSM का पूरा नाम है — On-Screen Marking। इसका मतलब यह है कि
- अब सीबीएसई कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन (Copy Checking) डिजिटल तरीके से होगा।
- कॉपियों को पहले स्कैन किया जाएगा और फिर कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखेगा, जहां शिक्षक इसे देखकर मार्क करेंगे।
- यह 2026 के बोर्ड से लागू हो रहा है।
अब कागज़ की कॉपियाँ हाथ में लेकर नहीं चेक की जाएँगी — सभी मूल्यांकन डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा।
यह बदलाव क्यों किया गया? (उद्देश्य)
CBSE ने OSM क्यों शुरू किया — इसके मुख्य कारण हैं:
✅ ज़्यादा तेज़ और सही मूल्यांकन: डिजिटल सिस्टम में कॉपी की हर पेज़ आसान रूप से जांची जा सकती है, जिससे गलतियाँ कम होंगी।
✅ गलतियाँ कम होंगी: कंप्यूटर वाले सिस्टम से totalling errors (जैसे जोड़-घटाव में गलतियाँ) कम होंगी।
✅ कहां से भी मार्क कर सकते हैं: शिक्षकों को कॉपियाँ अपने स्कूल से ही जांचने का मौका मिलेगा — उन्हें अलग evaluation centre नहीं जाना पड़ेगा।
✅ पारदर्शिता में सुधार: स्कैन कॉपी होने पर हर स्टेप पर रिकॉर्ड रहेगा और बाद में कोई संशय कम होगा।
✅ समय और लागत बचत: कॉपियों को ढोने-ले जाने की ज़रूरत नहीं रहेगी, इसका खर्च बचेगा।
➡️ सीबीएसई इसे एक मॉडर्न और अधिक भरोसेमंद मूल्यांकन प्रक्रिया बनाने का हिस्सा मान रहा है।
👍 OSM के फायदे — छात्रों, शिक्षकों और स्कूलों के लिए
🎓 छात्रों के लिए:
✔️ मार्किंग ज़्यादा सटीक (accurate) हो सकती है।
✔️ परिणाम जल्दी आ सकते हैं।
✔️ कम मानवीय गलतियां (जोड़-घटाव में गलती) होंगी।
👩🏫 शिक्षकों के लिए:
✔️ Evaluation के लिए बाहर evaluation centres नहीं जाना पड़ेगा।
✔️ Teachers अपने नियमित स्कूल समय के साथ सहजता से चेक कर सकते हैं।
✔️ जल्दी काम ख़त्म हो सकता है अगर तकनीक सही मिले।
🏫 स्कूलों के लिए:
✔️ समय-बचत और लागत-बचत (कॉपी को ढोने का खर्च गायब)।
✔️ डिजिटल readiness से भविष्य में अन्य प्रक्रियाएँ भी बेहतर हो सकती हैं।
नुकसान या चुनौतियाँ (Concerns)
❗ शुरुआत में तकनीकी परेशानियाँ: स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली सही-से होना जरूरी है।
❗ शिक्षकों के लिए स्क्रीन-सी मार्किंग मुश्किल हो सकती है: बहुत देर तक स्क्रीन देखकर मार्क करना थकावट बढ़ा सकता है।
❗ कुछ का कहना है कि शिक्षक स्क्रीन पर चेकिंग से उतने अनुकूल नहीं होंगे (Reddit जैसी चर्चा में) — खासकर अगर हाथ की लिखावट समझने में मुश्किल हो तो।
❗ अभ्यास की कमी: शुरुआती साल में हर evaluator को डिजिटल सिस्टम से अनुकूल होने में समय लग सकता है।

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