Wednesday, January 14, 2026

परामर्श और मार्गदर्शन: भ्रम, अंतर और वास्तविकता

 परामर्श और मार्गदर्शन: भ्रम, अंतर और वास्तविकता


आज हमारे समाज में परामर्श (Counselling) और मार्गदर्शन (Guidance) शब्दों का प्रयोग बहुत आम हो गया है। लेकिन अक्सर लोग इन दोनों को एक ही अर्थ में इस्तेमाल कर लेते हैं। कोई शिक्षक अगर किसी छात्र की बात सुन ले, उसे समझा दे या कोई सुझाव दे दे, तो उसे भी परामर्श कह दिया जाता है। यहीं से भ्रांति शुरू होती है।

वास्तव में परामर्श और मार्गदर्शन एक जैसे नहीं हैं, बल्कि एक ही सिक्के के दो अलग-अलग पहलू हैं।

मार्गदर्शन क्या है?

मार्गदर्शन का अर्थ है — रास्ता दिखाना।

जब किसी व्यक्ति को यह समझ नहीं आता कि उसे क्या करना चाहिए, किस दिशा में जाना चाहिए, तब कोई अनुभवी व्यक्ति अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर उसे दिशा देता है, यही मार्गदर्शन है।

उदाहरण:

  • छात्र को विषय चुनने में मदद करना
  • करियर के विकल्प समझाना
  • पढ़ाई की रणनीति बताना
  • जीवन से जुड़े सामान्य निर्णयों पर सलाह देना

मार्गदर्शन सूचना और सुझाव पर आधारित होता है। इसमें समस्या की गहराई में जाने की बजाय समाधान का रास्ता बताया जाता है।


परामर्श क्या है?

परामर्श इससे थोड़ा अलग और गहरा विषय है।

परामर्श का अर्थ है — व्यक्ति की समस्या को समझना, उसकी भावनाओं को जानना और उसे स्वयं समाधान तक पहुँचने में मदद करना।


उदाहरण:

  • छात्र का तनाव, डर, आत्मविश्वास की कमी
  • अवसाद, गुस्सा, भ्रम, असमंजस
  • पारिवारिक या व्यक्तिगत मानसिक समस्याएँ

परामर्श में सिर्फ सलाह नहीं दी जाती, बल्कि सुनना, समझना और सही तरीके से बातचीत करना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

शिक्षक से बात करना: परामर्श या मार्गदर्शन?

अगर कोई छात्र स्कूल में किसी अध्यापक के पास जाकर अपनी समस्या बताता है और अध्यापक उसे समझाकर कोई समाधान सुझा देता है, तो अधिकतर मामलों में वह मार्गदर्शन होता है, न कि पूर्ण परामर्श।


यदि शिक्षक विषय, पढ़ाई या सामान्य जीवन की सलाह दे रहा है → मार्गदर्शन

यदि शिक्षक छात्र की मानसिक स्थिति, भावनात्मक परेशानी को गहराई से समझकर विशेष तरीके से बातचीत करता है → तब यह परामर्श की ओर बढ़ता है


परामर्श और मार्गदर्शन में मुख्य अंतर

बिंदु मार्गदर्शन परामर्श

उद्देश्य रास्ता दिखाना समस्या की जड़ समझना

प्रकृति सामान्य सलाह गहन और संवेदनशील

प्रक्रिया सरल बातचीत वैज्ञानिक व व्यवस्थित

देने वाला शिक्षक, अभिभावक, वरिष्ठ प्रशिक्षित परामर्शदाता

समय कम अपेक्षाकृत अधिक


क्या परामर्श हर कोई दे सकता है?

नहीं।

परामर्श एक संवेदनशील प्रक्रिया है। इसमें व्यक्ति के मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति से जुड़ा काम होता है। गलत परामर्श नुकसान भी पहुँचा सकता है।


परामर्श देने के लिए जरूरी है:


मनोविज्ञान की समझ

  • विशेष प्रशिक्षण
  • गोपनीयता बनाए रखने की क्षमता
  • धैर्य और सहानुभूति
  • परामर्श की प्रक्रिया क्या है?
  • परामर्श कोई साधारण बातचीत नहीं होती। इसकी एक प्रक्रिया होती है:
  • समस्या को ध्यान से सुनना
  • व्यक्ति पर विश्वास बनाना
  • उसकी भावनाओं को समझना
  • समस्या की जड़ तक पहुँचना
  • समाधान खोजने में सहायता करना

इसमें परामर्शदाता समाधान थोपता नहीं, बल्कि व्यक्ति को स्वयं सही निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।


कौन परामर्श दे सकता है?

  • प्रशिक्षित काउंसलर
  • मनोवैज्ञानिक
  • स्कूल/कॉलेज के प्रोफेशनल काउंसलर
  • मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ

शिक्षक और अभिभावक मार्गदर्शन दे सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सही परामर्शदाता तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं।


निष्कर्ष

परामर्श और मार्गदर्शन दोनों ही जीवन में अत्यंत आवश्यक हैं, लेकिन दोनों को एक जैसा समझना गलत है।

जहाँ मार्गदर्शन दिशा देता है, वहीं परामर्श मन को संभालता है।

आज के बदलते समय में हमें यह समझना होगा कि हर समस्या सिर्फ सलाह से हल नहीं होती, कभी-कभी सही परामर्श जीवन को नई दिशा दे सकता है।


शारीरिक स्वास्थ्य जितना जरूरी है, मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है।

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