हालातों की लिए फरमाइश न कर
लूट लेंगे कश्ती तेरे अपने ही
अब अपने दर्द की और नुमाइश न कर
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"एक समाज, अनेक बँटवारे" साधारण से दिखने वाले समाज को चंद लोगों ने बांट दिया,अलग धड़ों मे सर्वप्रथम बंटवारा था स्त्री और पुरुष ...
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