नहीं मिलता यां कोई गम समेटने के लिए
बैठे रहते है, सब दर्द ए गम बेचने के लिए
जख्म पर मरहम का लेप लगाने वाले
अक़्सर होते है खरीददार यहाँ उन जख्मों को सींचने के लिए
"एक समाज, अनेक बँटवारे" साधारण से दिखने वाले समाज को चंद लोगों ने बांट दिया,अलग धड़ों मे सर्वप्रथम बंटवारा था स्त्री और पुरुष ...
👍👍👍Very nice 👍👍👍
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