Monday, January 5, 2026

राजा और कर्म रूपी पौधे (बाल कथा)

 राजा और कर्म रूपी पौधे 

(बाल कथा)


एक बार की बात है। एक राज्य में एक बुद्धिमान राजा राज करता था। राजा अपने राज्य को बहुत प्रेम करता था, लेकिन उसके मन में एक प्रश्न हमेशा रहता था—

“क्या मेरे राज्य के लोग सच में अच्छे हैं, या केवल अच्छा बनने का नाटक करते हैं?”


इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए राजा ने एक दिन अपने दरबार में एक बड़ी सभा बुलाई।

सभा में राजा ने घोषणा की—


“आज मैं अपने राज्य के हर व्यक्ति को एक-एक पौधा भेंट करूँगा।”


सभी लोग बहुत खुश हुए।

राजा ने हर व्यक्ति को एक छोटा सा पौधा दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि यह कर्म रूपी पौधा है, जो मनुष्य के कर्मों से बढ़ता है।


लोग इस रहस्य से पूरी तरह अनजान थे।


राजा के आदेश के बाद लोग अपने-अपने घर चले गए और पौधों की देखभाल में लग गए।

कोई रोज़ खाद डालता, कोई बार-बार पानी देता, कोई धूप-छाँव का ध्यान रखता।


लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि—


किसी का पौधा कुछ ही दिनों में सूखकर टहनी बन गया


किसी का पौधा थोड़ा बढ़ा और फिर रुक गया


और कुछ लोगों के पौधे बढ़ते-घटते रहते


लोग आपस में हैरान थे।

“हम तो इतना ध्यान रख रहे हैं, फिर भी पौधा क्यों नहीं बढ़ रहा?”


कुछ समय बाद एक दिन राजा भेष बदलकर अपने राज्य की सैर पर निकले।

जो दृश्य उन्होंने देखा, वह चौंकाने वाला था।


राजा ने देखा कि—

अधिकतर लोगों के पौधे नष्ट हो चुके थे।

कुछ के पौधे बस मध्यम आकार तक ही सीमित रह गए थे।


यह देखकर राजा और भी गंभीर हो गए।


क्योंकि जो लोग सबसे अधिक अच्छा बनने का दिखावा करते थे—

जो हर समय दूसरों को उपदेश देते थे—

उन्हीं के पौधे सबसे अधिक सूखे हुए थे।


और जो लोग शांत रहते थे,

निस्वार्थ मदद करते थे,

सच बोलते थे और किसी से जलते नहीं थे—

उनके पौधे हरे-भरे थे और कुछ तो छोटे-छोटे पेड़ बन चुके थे।


अगले दिन राजा ने फिर से दरबार की सभा बुलाई।


राजा बोले—


“अब मैं तुम्हें इस पौधे का सत्य बताता हूँ।

यह कोई साधारण पौधा नहीं, बल्कि कर्म रूपी पौधा है।

यह खाद और पानी से नहीं, बल्कि तुम्हारे अच्छे और बुरे कर्मों से बढ़ता है।”


राजा ने आगे कहा—


“जो केवल दिखावा करता है, उसका पौधा सूख जाता है।

और जो सच्चे दिल से अच्छा कर्म करता है, उसका पौधा अपने आप बढ़ता है।”


यह सुनकर सभी लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ।

उन्होंने समझ लिया कि सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता।


उस दिन के बाद राज्य के लोग दिखावा छोड़कर सच में अच्छे कर्म करने लगे।

धीरे-धीरे उनके कर्म रूपी पौधे फिर से हरे-भरे होने लगे।


राजा संतुष्ट थे, क्योंकि अब उनका राज्य केवल देखने में नहीं,

वास्तव में अच्छा बन चुका था।

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