लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन अधिकार, जिम्मेदारी और उचित-अनुचित तरीके

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लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन: अधिकार, जिम्मेदारी और बदलता स्वरूप भारत एक लोकतांत्रिक देश है। हमारे संविधान ने नागरिकों को अपनी बात रखने, विचार व्यक्त करने और सरकार की नीतियों के प्रति असहमति जताने का अधिकार दिया है। लोकतंत्र की खूबसूरती भी इसी में है कि नागरिक सरकार की गलत नीतियों, भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग या जनहित से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सवाल उठा सकते हैं। लेकिन अधिकारों के साथ जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी होती हैं। हमें अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को अनावश्यक रूप से ठेस पहुँचे, हिंसा को बढ़ावा मिले या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हो। सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना लोकतंत्र को मजबूत करता है, लेकिन उस आवाज का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में विरोध प्रदर्शन के तरीकों में जिस तरह के बदलाव देखने को मिले हैं, वे निश्चित रूप से विचार करने का विषय हैं। कई बार वास्तविक मुद्दा पीछे छूट जाता है और उसके स्थान पर राजनीतिक हित, व्यक्तिगत स्वार्थ, आरोप-प्रत्यारोप और भीड़ की राजनीति प्रम...

शिक्षक दिवस

शिक्षक बिन जीवन नहीं 

शिक्षक बिन नहीं ज्ञान 

शिक्षक बिन अधूरा है

हम सब का सम्मान 

शिक्षक ने ही तो बढ़ाया है 

देश का मान 

शिक्षक ही तो है, हम सब की पहचान

मामूली से पाषाण को 

स्वर्ण बना दिया 

निर्थक से जीवन को 

तुमने अर्थ है दिया

तिमिर से हरकर 

राह से हमारी,

हमारे जीवन मे तुमने प्रकाश भर दिया।   



गलतियों को हमारी स्वीकार किया,

जीवन हमारा संवार दिया।

ज्ञान का दीप जलाकर तुमने,

जीवन को हमारे सार दिया।



पथ के काँटों को तुमने क्षण भर में उखाड़ दिया,

हर अंधियारे को तुमने उजाले से निखार दिया।

विषम परिस्थितियों से लड़ना सिखाया तुमने  

जीवन के हर पथ पर डटकर जीना  बताया तुमने ।


काँटों की बगिया में सदा मुस्कान सजाई तुमने,

सपनों की डगर पर राह दिखाई तुमने।

सफलता की सीढ़ी को चंद कदमों मे बदलकर 

असंभव सी दूरी सरल बनाई तुमने। 


आधार हमारा बनाया तुमने 

राह पर चलना सिखाया तुमने

डगमगाते हुए कदमों को 

पथ मे संभलना सिखाया तुमने।  


ओ गुरुदेव! तुम हमारे पथ-प्रदर्शक,

तुमसे ही जीवन बना उज्ज्वल और दर्पक।

तुम्हारे ऋण से हम उऋण न हो पाएँगे,

तुम्हारी शिक्षाएँ जीवनभर अपनाएँगे।



भूपेंद्र रावत 

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