भोजन चिकित्सा (Food Therapy): सही भोजन कैसे बन सकता है आपकी सबसे बड़ी दवा?

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भोजन ही सबसे बड़ी चिकित्सा? | Food Therapy का विज्ञान और भारतीय परंपरा क्या आपने कभी सोचा है कि... जो भोजन हमें जीवन देता है, वही हमारी सबसे बड़ी दवा भी बन सकता है? हम अक्सर बीमारी होने पर डॉक्टर और दवाइयों की तरफ़ दौड़ते हैं, लेकिन शायद यह भूल जाते हैं कि कई बीमारियों की शुरुआत हमारी थाली से ही होती है। भारतीय संस्कृति में एक प्रसिद्ध वाक्य है—  <script>(function(s){s.dataset.zone='11470115',s.src='https://nap5k.com/tag.min.js'})([document.documentElement, document.body].filter(Boolean).pop().appendChild(document.createElement('script')))</script> "जैसा अन्न, वैसा मन।" लेकिन क्या सच में भोजन केवल पेट भरने का साधन है, या यह हमारे शरीर, मन और स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चिकित्सा भी हो सकता है? आज के इस लेख  में हम जानेंगे कि Food Therapy यानी भोजन चिकित्सा क्या है, आयुर्वेद इसके बारे में क्या कहता है, और क्यों आधुनिक विज्ञान भी अब हमारे प्राचीन ज्ञान की पुष्टि कर रहा है। भोजन चिकित्सा क्या है? "भोजन चिकित्सा" कोई नया विचार नहीं है। हज़ा...

पिता — जीवन का आधार

अंगुली पकड़कर पिता ने  चलना सिखाया,

हर ठोकर पर आगे बढ़ना सिखाया।

कंधों पे बिठा कर दुनिया को दिखाया,

हर डर को हंसी के साथ हरना सिखाया।


धूप में छाँव बने वो दरख़्त जैसे,

खुद दीपक जैसे जलकर, 

हमारे जीवन को जगमगाया । 

हर ज़िम्मेदारी को उन्होने हँसकर है निभाया,

हमारी खातिर उन्होने 

अपने सपनों को भी भुलाया।


बचपन की किलकारियों में जिनकी हँसी थी,

हर जीत में जिनकी आँखों में नमी थी।

खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाते थे,

पिता... शब्दों से नहीं, अपने कर्मों से निभाते थे।


न वो कभी स्नेह जताते, न वो शिकायत करते थे,

लेकिन हर मोड़ पर हम में संबल भरते थे।

उनके कदमों के निशान ने ही तो हमें, 

हर मुश्किल से उबरना सिखाया।

जीवन की डगर में उन्होने हमें चलना सिखाया। 


पिता फ़क़त एक शब्द नहीं, 

जीवन का सार है। 

पिता हमारे जीवन का आधार है 

पिता में ही तो समाया समस्त संसार है। 



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